परिमेय और अपरिमेय का योग या गुणनफल (Sum or Product of Rational and Irrational) से जुड़े प्रश्न स्वयं हल करना।
परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या का योग या अंतर अपरिमेय होता है। गैर-शून्य परिमेय संख्या से अपरिमेय संख्या का गुणा भी अपरिमेय होता है।
3 को 3 बटा 1 लिख सकते हैं, इसलिए यह परिमेय है। 2 पूर्ण वर्ग नहीं है, इसलिए उसका वर्गमूल अपरिमेय है।
3 = 3/1
मान लें 3 + √2 का मान x परिमेय है। तब 3 घटाने पर वर्गमूल 2 मिलेगा।
√2 = x − 3
दो परिमेय संख्याओं को घटाने पर परिमेय संख्या मिलती है। पर यहाँ वर्गमूल 2 मिला, जो अपरिमेय है। इसलिए हमारी मान्यता गलत है।
अपरिमेय
परिमेय संख्या और अपरिमेय संख्या का योग या अंतर अपरिमेय होता है। गैर-शून्य परिमेय संख्या से अपरिमेय संख्या का गुणा भी अपरिमेय होता है।
-4 को -4 बटा 1 लिख सकते हैं, इसलिए यह परिमेय है। 2 पूर्ण वर्ग नहीं है, इसलिए उसका वर्गमूल अपरिमेय है।
-4 = -4/1
मान लें (-4) × √2 का मान x परिमेय है। तब -4 से भाग देने पर वर्गमूल 2 मिलेगा।
√2 = x ÷ (-4)
परिमेय संख्या को गैर-शून्य परिमेय संख्या -4 से भाग देने पर परिमेय संख्या मिलती है। पर यहाँ वर्गमूल 2 मिला, जो अपरिमेय है। इसलिए मान्यता गलत है।
अपरिमेय
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।