📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)नींबू और इमली खट्टे लगते हैं, जबकि साबुन का घोल कड़वा और छूने में चिकना लगता है। खट्टेपन के पीछे अम्ल (Acid) और कड़वेपन के पीछे क्षारक (Base) होता है।
पर प्रयोगशाला में किसी पदार्थ को चखना खतरनाक है। इसलिए हम सूचक (Indicator) का सहारा लेते हैं, जो रंग बदलकर खुद बता देता है कि पदार्थ कैसा है।
🧠 समझिए (Understand)सूचक (Indicator) ऐसे रंजक या रंजकों के मिश्रण हैं जो अम्ल और क्षारक की उपस्थिति में अलग-अलग रंग दिखाते हैं।
लिटमस एक प्राकृतिक सूचक (Natural indicator) है, जो लाइकेन नामक पौधे से मिलता है। उदासीन विलयन में इसका रंग बैंगनी रहता है।
हल्दी, लाल पत्ता गोभी और हाइड्रेंजिया जैसे फूलों की पंखुड़ियाँ भी प्राकृतिक सूचक हैं। मेथिल ऑरेंज और फिनॉल्फ़्थैलिन संश्लेषित सूचक (Synthetic indicators) हैं।
कुछ पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है। इन्हें गंधीय सूचक (Olfactory indicators) कहते हैं, जैसे प्याज और वनीला।
उदाहरण 1 (Example 1) — केवल लाल लिटमस से तीन परखनलियाँ पहचाननातीन परखनलियों में आसुत जल, अम्लीय विलयन और क्षारीय विलयन हैं, पर आपके पास सिर्फ लाल लिटमस पत्र है।
तीनों में लाल लिटमस डालें। जिसमें यह नीला हो जाए, वही क्षारीय विलयन है। बाकी दो में कोई बदलाव नहीं होगा।
क्षारीय विलयन में नीला हुआ यही पत्र अब नीले लिटमस की तरह काम करेगा। इसे बची हुई दोनों परखनलियों में डालें।
जिसमें यह फिर से लाल हो जाए वह अम्ल है; जिसमें नीला ही रहे वह आसुत जल है।
एक ही पत्र को पहले क्षारक से नीला करके तीनों की पहचान हो जाती है।
उदाहरण 2 (Example 2) — सफेद कपड़े पर हल्दी का दागसब्ज़ी का दाग सफेद कपड़े पर लगा और साबुन रगड़ते ही वह लाल-भूरा हो गया।
साबुन क्षारीय होता है, और हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है।
क्षारक के संपर्क में आते ही हल्दी का पीला रंग लाल-भूरा हो जाता है।
खूब पानी से धोने पर क्षारक हट जाता है और दाग फिर पीला हो जाता है।
हल्दी क्षारक की उपस्थिति में लाल-भूरी और सामान्य अवस्था में पीली रहती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)फिनॉल्फ़्थैलिन अम्ल में गुलाबी हो जाता है। ❌
उल्टा है। फिनॉल्फ़्थैलिन अम्ल में रंगहीन रहता है और क्षारक में गुलाबी होता है।
फिनॉल्फ़्थैलिन: अम्ल में रंगहीन, क्षारक में गुलाबी।