📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में लोहे की साफ कील बीस मिनट डुबोकर रखिए—कील पर भूरी परत चढ़ जाती है और विलयन का नीला रंग हल्का पड़ जाता है।
उल्टा प्रयोग—आयरन सल्फेट में ताँबे का तार—करने पर कुछ नहीं होता। यही फर्क बताता है कि दोनों में अधिक क्रियाशील कौन है।
🧠 समझिए (Understand)अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन या गलित अवस्था से विस्थापित कर देती है।
यदि धातु A, धातु B को उसके विलयन से विस्थापित कर दे, तो A, B से अधिक क्रियाशील है।
विस्थापन अभिक्रियाएँ क्रियाशीलता की तुलना का सबसे अच्छा प्रमाण देती हैं, क्योंकि कई धातुएँ ऑक्सीजन, जल या अम्ल से अभिक्रिया ही नहीं करतीं और उन्हें उन प्रयोगों से क्रम में नहीं रखा जा सकता।
कील पर चढ़ी भूरी परत ताँबा है और विलयन का रंग इसलिए बदलता है क्योंकि नीला कॉपर सल्फेट घटकर हरा आयरन सल्फेट बन रहा है।
उदाहरण 1 (Example 1) — कॉपर सल्फेट में लोहे की कीलनीले CuSO₄ विलयन में साफ लोहे की कील रखी गई।
श्रेणी में लोहा ताँबे से ऊपर है, इसलिए लोहा ताँबे को विस्थापित करेगा।
Fe(s) + CuSO₄(aq) → FeSO₄(aq) + Cu(s)
कील पर भूरा ताँबा जमता है और नीला विलयन हल्का हरा हो जाता है।
यह विस्थापन अभिक्रिया (Displacement reaction) है।
उदाहरण 2 (Example 2) — आयरन सल्फेट में जिंकFeSO₄ विलयन में जिंक का टुकड़ा डाला गया।
जिंक श्रेणी में लोहे से ऊपर है।
Zn(s) + FeSO₄(aq) → ZnSO₄(aq) + Fe(s); विलयन का हरा रंग फीका पड़ता है और भूरा लोहा जमा होता है।
जिंक लोहे को विस्थापित कर देता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)ताँबा लोहे को आयरन सल्फेट से विस्थापित कर देगा। ❌
ताँबा श्रेणी में लोहे से नीचे है, इसलिए ऐसा नहीं होगा—इसी कारण उस परखनली में कोई बदलाव नहीं दिखता।
केवल ऊपर वाली धातु ही नीचे वाली को विस्थापित करती है।