भर्जन, निस्तापन और अपचयन (Roasting, Calcination and Reduction)
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आज क्या सीखेंगे
अयस्क से धातु निकालने के चरण क्रम से बताना और सही विधि चुनना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
जिंक का अयस्क कभी सल्फाइड होता है तो कभी कार्बोनेट। पर दोनों को सीधे धातु में बदलना कठिन है।
इसलिए पहले दोनों को ऑक्साइड में बदला जाता है—क्योंकि ऑक्साइड से धातु निकालना सबसे आसान है।
🧠 समझिए (Understand)
सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की धातुएँ इतनी कम क्रियाशील हैं कि उनके ऑक्साइड केवल गर्म करने से ही धातु में बदल जाते हैं। जैसे सिनेबार (HgS) को हवा में गर्म करने पर पहले HgO बनता है, जो आगे गर्म करने पर पारा दे देता है।
मध्यम क्रियाशील धातुएँ प्रायः सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में मिलती हैं। अपचयन से पहले इन्हें ऑक्साइड में बदलना पड़ता है।
सल्फाइड अयस्क को अधिक वायु की उपस्थिति में तेज़ गर्म करके ऑक्साइड में बदलना भर्जन (Roasting) कहलाता है।
कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में तेज़ गर्म करके ऑक्साइड में बदलना निस्तापन (Calcination) कहलाता है।
इसके बाद धातु ऑक्साइड को कार्बन (कोक) जैसे उपयुक्त अपचायक से अपचयित करके धातु प्राप्त की जाती है। अयस्क से धातु पाना भी एक अपचयन प्रक्रिया ही है।
कभी-कभी विस्थापन अभिक्रियाएँ भी काम आती हैं। सोडियम, कैल्सियम और ऐलुमिनियम जैसी अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ अपचायक के रूप में प्रयोग होती हैं। ये अभिक्रियाएँ इतनी ऊष्माक्षेपी होती हैं कि धातु गलित अवस्था में निकलती है।
श्रेणी में सबसे ऊपर की धातुएँ कार्बन से अपचयित नहीं हो सकतीं, क्योंकि उनकी ऑक्सीजन के प्रति बंधुता कार्बन से अधिक है। इन्हें विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त किया जाता है—धातु कैथोड पर और क्लोरीन ऐनोड पर मिलती है।
धातु की सक्रियता तय करती है कि उसे गर्म करके, कार्बन से अपचयित करके या विद्युत अपघटन से निकाला जाएगा।