📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)अपचयन से जो धातु मिलती है वह पूरी तरह शुद्ध नहीं होती—उसमें अशुद्धियाँ रह जाती हैं।
इन्हें हटाने का सबसे प्रचलित तरीका यह है कि अशुद्ध धातु को ही ऐनोड बना दिया जाए और बिजली से उसे धीरे-धीरे शुद्ध करके दूसरी ओर जमा किया जाए।
🧠 समझिए (Understand)ताँबा, जिंक, टिन, निकल, चाँदी और सोना जैसी कई धातुएँ विद्युत अपघटन से परिष्कृत की जाती हैं।
इस विधि में अशुद्ध धातु को ऐनोड और शुद्ध धातु की पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है।
उसी धातु के लवण का विलयन विद्युत अपघट्य (Electrolyte) के रूप में प्रयोग होता है। ताँबे के परिष्करण में अम्लीकृत कॉपर सल्फेट का विलयन लिया जाता है।
धारा प्रवाहित करने पर ऐनोड की शुद्ध धातु घुलकर विद्युत अपघट्य में चली जाती है और उतनी ही शुद्ध धातु विलयन से कैथोड पर जमा हो जाती है।
घुलनशील अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं, जबकि अघुलनशील अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे बैठ जाती हैं। इसी को ऐनोड पंक (Anode mud) कहते हैं।
उदाहरण 1 (Example 1) — ताँबे का परिष्करणअशुद्ध ताँबे को शुद्ध करना है।
ऐनोड—अशुद्ध ताँबा; कैथोड—शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी; विद्युत अपघट्य—अम्लीकृत कॉपर सल्फेट विलयन।
ऐनोड का ताँबा घुलकर विलयन में जाता है और शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है।
कैथोड पर शुद्ध ताँबा मिलता है और ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक बैठ जाता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — किसी धातु M का परिष्करणपरीक्षा में अक्सर अज्ञात धातु M देकर तीनों चीज़ें पूछी जाती हैं।
ऐनोड अशुद्ध M, कैथोड शुद्ध M की पट्टी, और विद्युत अपघट्य M के किसी लवण का विलयन।
विधि हर धातु के लिए एक ही रहती है, केवल नाम बदलता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)परिष्करण में कैथोड पर अशुद्ध धातु रखते हैं। ❌
कैथोड पर शुद्ध धातु की पतली पट्टी रखी जाती है, जिस पर और शुद्ध धातु जमती है।
अशुद्ध धातु ऐनोड पर और शुद्ध धातु कैथोड पर।