📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)मेन्डेलीफ की सारणी की सारी कठिनाइयाँ एक ही जगह से आ रही थीं—आधार के रूप में परमाणु द्रव्यमान चुनना।
1913 में हेनरी मोज़्ले ने दिखाया कि तत्व का अधिक आधारभूत गुण उसका परमाणु द्रव्यमान नहीं, बल्कि परमाणु संख्या है।
🧠 समझिए (Understand)परमाणु संख्या (Atomic number) किसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या है। इसे Z से दर्शाते हैं।
आधुनिक आवर्त नियम कहता है: तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं।
परमाणु संख्या को आधार बनाते ही वे सभी विसंगतियाँ दूर हो गईं जो परमाणु द्रव्यमान के आरोही क्रम से आ रही थीं।
हाइड्रोजन की स्थिति अब भी अनूठी है, पर समस्थानिकों की समस्या पूरी तरह हल हो गई—समस्थानिकों की परमाणु संख्या समान होती है, इसलिए वे एक ही स्थान पर आते हैं।
कोबाल्ट और निकैल का क्रम भी ठीक हो गया, क्योंकि कोबाल्ट की परमाणु संख्या 27 और निकैल की 28 है।
उदाहरण 1 (Example 1) — समस्थानिक की समस्या का हलCl-35 और Cl-37 अब कहाँ रखे जाते हैं?
दोनों समस्थानिकों की परमाणु संख्या 17 है, क्योंकि दोनों के नाभिक में 17 प्रोटॉन हैं।
आधुनिक सारणी का आधार परमाणु संख्या है, इसलिए दोनों एक ही स्थान पर आते हैं।
समस्थानिकों की समस्या आधुनिक आवर्त सारणी में पूरी तरह हल हो गई।
उदाहरण 2 (Example 2) — कोबाल्ट और निकैल का क्रममेन्डेलीफ को इनका क्रम तोड़ना पड़ा था; अब क्या है?
कोबाल्ट का परमाणु द्रव्यमान निकैल से अधिक है, इसलिए द्रव्यमान के क्रम में वह बाद में आना चाहिए था।
पर परमाणु संख्या में कोबाल्ट 27 और निकैल 28 है, इसलिए कोबाल्ट पहले ही आता है।
परमाणु संख्या को आधार बनाने पर क्रम अपने आप सही हो गया।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)आधुनिक आवर्त नियम का आधार परमाणु द्रव्यमान है। ❌
आधार परमाणु संख्या है; यही मेन्डेलीफ और आधुनिक सारणी का मुख्य अंतर है।
आधुनिक आवर्त नियम का आधार परमाणु संख्या है।