जंतुओं में अंतःस्रावी ग्रंथियाँ होती हैं, जो हॉर्मोन नामक रसायन सीधे रुधिर में स्रावित करती हैं।
रुधिर इन्हें शरीर के सभी भागों तक पहुँचा देता है, पर ये केवल अपने लक्ष्य अंगों पर ही कार्य करते हैं।
उत्तर: हॉर्मोन शरीर के एक भाग में बनकर दूसरे भाग तक पहुँचते हैं और वहाँ इच्छित प्रभाव पैदा करते हैं—यही रासायनिक समन्वय है। इनका स्रावण पुनर्भरण क्रियाविधि से नियंत्रित रहता है।
अवटु ग्रंथि को थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने के लिए आयोडीन अनिवार्य है।
थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय को नियंत्रित करता है, जिससे वृद्धि के लिए संतुलन बना रहे।
उत्तर: आहार में आयोडीन की कमी होने पर थायरॉक्सिन नहीं बन पाता और गॉयटर हो सकता है, जिसका एक लक्षण फूली हुई गर्दन है। इसीलिए आयोडीन युक्त नमक की सलाह दी जाती है।
इंसुलिन का उत्पादन अग्न्याशय में होता है और यह रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है।
यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जो कई हानिकारक प्रभावों का कारण बनता है।
उत्तर: ऐसे रोगियों में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, इसलिए बाहर से इंजेक्शन देकर कमी पूरी की जाती है और शर्करा का स्तर नियंत्रित रखा जाता है।
एड्रीनलीन अधिवृक्क ग्रंथि से सीधे रुधिर में स्रावित होकर हृदय सहित लक्ष्य अंगों तक पहुँच जाती है।
हृदय की धड़कन बढ़ जाती है, ताकि पेशियों को अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके।
पाचन तंत्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है, क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आसपास की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं; इससे रुधिर कंकाल पेशियों की ओर मुड़ जाता है।
डायाफ्राम तथा पसलियों की पेशी के संकुचन से श्वसन दर भी बढ़ जाती है।
उत्तर: ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर शरीर को विषम परिस्थिति—लड़ने या भागने—के लिए तैयार कर देती हैं।