डी.एन.ए. में ही जीव के शारीरिक अभिकल्प की पूरी सूचना रहती है।
कोशिका विभाजन से पहले इसकी प्रतिकृति बन जाती है, जिससे यह सूचना संतति तक पहुँच जाती है और संतति अपने जनक जैसी बनती है।
प्रतिकृति बनने की प्रक्रिया पूर्णतः सटीक न होने के कारण छोटी-छोटी भिन्नताएँ भी आ जाती हैं।
उत्तर: डी.एन.ए. प्रतिकृति ही स्पीशीज़ की पहचान संतति तक पहुँचाती है और साथ में विभिन्नता भी देती है, इसलिए यह जनन की बुनियाद है।
कोई व्यष्टि अपने जीवनकाल में जैसी है वैसी ही रहकर जी सकती है, इसलिए उसे विभिन्नता की जरूरत नहीं पड़ती।
पर यदि पर्यावरण अचानक बदल जाए, जैसे तापमान बहुत बढ़ जाए, तो एक जैसी सारी व्यष्टियाँ एक साथ समाप्त हो सकती हैं।
विभिन्नता होने पर कुछ व्यष्टियाँ उस बदलाव को सह लेती हैं और स्पीशीज़ बची रहती है।
उत्तर: इसीलिए विभिन्नता स्पीशीज़ के स्थायित्व के लिए लाभदायक है, जबकि किसी एक व्यष्टि के जीवित रहने के लिए आवश्यक नहीं।