आवर्धन का मान 1 होने का अर्थ है कि प्रतिबिंब का आकार बिंब के आकार के बिल्कुल बराबर है।
आवर्धन का धन चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा है।
उत्तर: +1 आवर्धन का अर्थ है कि समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब बिंब के बराबर साइज़ का, आभासी तथा सीधा है।
क्षमता का सूत्र है P = 1/f, जहाँ f मीटर में होती है।
इसे पलटने पर f = 1/P = 1/(−2.0) = −0.5 m, यानी −50 cm।
ऋणात्मक फोकस दूरी अवतल लेंस की होती है।
उत्तर: लेंस की फोकस दूरी −0.5 m है और यह एक अवतल अर्थात अपसारी लेंस है।
क्षमता और फोकस दूरी का संबंध है P = 1/f, इसलिए f = 1/P।
मान रखने पर f = 1/1.5 ≈ +0.67 m, यानी लगभग +67 cm।
फोकस दूरी धनात्मक आई है और धनात्मक फोकस दूरी उत्तल लेंस की होती है।
उत्तर: लेंस की फोकस दूरी लगभग 0.67 m है और यह उत्तल अर्थात अभिसारी लेंस है।
दिया है: h = +5.0 cm, u = −20 cm, R = +30 cm, इसलिए f = R/2 = +15 cm।
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f से 1/v = 1/f − 1/u = 1/15 + 1/20।
1/v = (4 + 3)/60 = 7/60, इसलिए v = 60/7 ≈ +8.6 cm।
v धनात्मक है, यानी प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बन रहा है और आभासी है।
आवर्धन m = −v/u = −8.6/(−20) = +0.43, इसलिए h′ = 0.43 × 5.0 ≈ +2.2 cm।
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे लगभग 8.6 cm दूरी पर बनेगा; यह आभासी, सीधा तथा लगभग 2.2 cm लंबा, यानी बिंब से छोटा होगा।
दिया है: h = +7.0 cm, u = −27 cm, f = −18 cm, क्योंकि अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f से 1/v = 1/f − 1/u = −1/18 + 1/27।
1/v = (−3 + 2)/54 = −1/54, इसलिए v = −54 cm।
v ऋणात्मक है, यानी प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm दूर बनेगा और वास्तविक होगा; परदा वहीं रखना चाहिए।
आवर्धन m = −v/u = −(−54)/(−27) = −2, इसलिए h′ = −2 × 7.0 = −14.0 cm।
उत्तर: परदे को दर्पण से 54 cm दूरी पर रखना चाहिए; प्रतिबिंब वास्तविक, उलटा तथा 14.0 cm साइज़ का, यानी आवर्धित होगा।