📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)दर्पण में अपना चेहरा दिखता है, पर दीवार में नहीं। दोनों पर प्रकाश तो पड़ता ही है।
अंतर यह है कि दर्पण की चिकनी सतह प्रकाश को एक ही दिशा में लौटाती है, जबकि दीवार उसे बिखेर देती है।
🧠 समझिए (Understand)किसी चमकीली सतह से टकराकर प्रकाश का वापस लौट जाना परावर्तन (Reflection) कहलाता है।
परावर्तन का पहला नियम यह है कि आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है, यानी ∠i = ∠r।
दूसरा नियम यह है कि आपतित किरण, परावर्तन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब तथा परावर्तित किरण—तीनों एक ही तल में होते हैं।
ये दोनों नियम हर परावर्ती पृष्ठ पर लागू होते हैं, चाहे वह समतल हो या गोलीय।
समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब सदा आभासी और सीधा होता है, उसका आकार बिंब के बराबर होता है, और वह दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूर बिंब सामने है।
समतल दर्पण में प्रतिबिंब पार्श्व परिवर्तित (Laterally inverted) होता है—बाईं ओर की वस्तु दाईं ओर दिखती है। इसीलिए एम्बुलेंस पर AMBULANCE उलटा लिखा जाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — समतल दर्पण में प्रतिबिंबसमतल दर्पण से बने प्रतिबिंब के क्या गुण हैं?
प्रतिबिंब आभासी होता है, यानी उसे परदे पर नहीं लिया जा सकता, और सदा सीधा होता है।
उसका आकार बिंब के आकार के बिल्कुल बराबर होता है।
वह दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर बिंब दर्पण के सामने रखा है।
इसके अलावा वह पार्श्व परिवर्तित होता है—बाईं ओर की वस्तु दाईं ओर दिखाई देती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)आपतन कोण दर्पण की सतह से मापा जाता है। ❌
दोनों कोण सदा अभिलंब से मापे जाते हैं, सतह से नहीं।
आपतन और परावर्तन कोण अभिलंब से मापे जाते हैं।