📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)न्यूटन ने एक प्रिज़्म से सूर्य का प्रकाश गुजारा और दीवार पर सात रंग दिखे।
फिर उन्होंने दूसरा प्रिज़्म उलटा रखा—और सातों रंग मिलकर फिर से श्वेत प्रकाश बन गए।
🧠 समझिए (Understand)श्वेत प्रकाश का अपने अवयवी वर्णों में विभाजित हो जाना विक्षेपण (Dispersion) कहलाता है।
प्रिज़्म से प्राप्त रंगों के इस क्रम को वर्णक्रम (Spectrum) कहते हैं, जिसका क्रम है—बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल।
विक्षेपण का कारण यह है कि विभिन्न रंगों के प्रकाश के लिए काँच का अपवर्तनांक अलग-अलग होता है, इसलिए हर रंग अलग-अलग कोण पर मुड़ता है।
लाल रंग का प्रकाश सबसे कम विचलित होता है और बैंगनी सबसे अधिक, इसलिए वे अलग-अलग दिखाई देने लगते हैं।
न्यूटन ने एक दूसरा सर्वसम प्रिज़्म उलटा रखकर दिखाया कि सातों रंग फिर मिलकर श्वेत प्रकाश बन जाते हैं, यानी श्वेत प्रकाश इन्हीं सात रंगों से बना है।
इंद्रधनुष वर्षा के बाद वायुमंडल में उपस्थित जल की सूक्ष्म बूँदों के कारण बनता है। हर बूँद एक छोटे प्रिज़्म की तरह काम करती है।
सूर्य के प्रकाश का बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तन और विक्षेपण होता है, फिर बूँद के भीतरी पृष्ठ से पूर्ण आंतरिक परावर्तन, और अंत में बाहर निकलते समय फिर अपवर्तन—इन्हीं तीन घटनाओं से इंद्रधनुष बनता है।
इंद्रधनुष सदा सूर्य के विपरीत दिशा में दिखाई देता है, इसलिए उसे देखते समय सूर्य हमारी पीठ के पीछे होता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — इंद्रधनुष कैसे बनता हैवर्षा के बाद आकाश में इंद्रधनुष क्यों दिखाई देता है?
वर्षा के बाद वायुमंडल में जल की सूक्ष्म बूँदें रह जाती हैं और हर बूँद एक छोटे प्रिज़्म की तरह काम करती है।
सूर्य का प्रकाश बूँद में प्रवेश करते समय अपवर्तित होकर अपने सात वर्णों में विक्षेपित हो जाता है।
ये वर्ण बूँद के भीतरी पृष्ठ से पूर्ण आंतरिक परावर्तन के बाद लौटते हैं और बाहर निकलते समय फिर अपवर्तित होते हैं।
इसी कारण हमें आकाश में रंगों का चाप दिखाई देता है, और वह सदा सूर्य के विपरीत दिशा में होता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)प्रिज़्म अपने आप रंग बनाता है। ❌
प्रिज़्म रंग बनाता नहीं; वह श्वेत प्रकाश में पहले से मौजूद रंगों को अलग कर देता है।
प्रिज़्म केवल विक्षेपण करता है।