📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)काँच के स्लैब से निकली किरण आपतित किरण के समांतर रहती है, पर प्रिज़्म से निकली किरण मुड़ी रह जाती है।
अंतर बस इतना है कि प्रिज़्म के दोनों अपवर्तक पृष्ठ समांतर नहीं, एक-दूसरे पर झुके होते हैं।
🧠 समझिए (Understand)काँच का प्रिज़्म एक त्रिभुजाकार रचना है, जिसके दो त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व-पृष्ठ होते हैं।
इसके दो पार्श्व फलकों के बीच के कोण को प्रिज़्म कोण (Angle of prism, A) कहते हैं।
प्रिज़्म में भी प्रकाश का अपवर्तन दो बार होता है—पहले वायु से काँच में प्रवेश करते समय और फिर काँच से वायु में निकलते समय।
काँच के आयताकार स्लैब में दोनों अपवर्तक पृष्ठ समांतर होते हैं, इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर निकलती है।
प्रिज़्म में दोनों अपवर्तक पृष्ठ एक-दूसरे पर झुके होते हैं, इसलिए दोनों मोड़ एक-दूसरे को रद्द नहीं करते और निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से मुड़ी रह जाती है।
आपतित किरण की दिशा तथा निर्गत किरण की दिशा के बीच के कोण को विचलन कोण (Angle of deviation) कहते हैं।
उदाहरण 1 (Example 1) — प्रिज़्म और स्लैब में अंतरप्रिज़्म से निकली किरण आपतित किरण के समांतर क्यों नहीं होती?
काँच के स्लैब में दोनों अपवर्तक पृष्ठ आपस में समांतर होते हैं, इसलिए पहले पृष्ठ पर हुआ मोड़ दूसरे पृष्ठ पर बराबर और विपरीत मोड़ से रद्द हो जाता है।
प्रिज़्म में दोनों पृष्ठ एक-दूसरे पर झुके होते हैं, इसलिए दूसरा मोड़ पहले को रद्द नहीं करता, बल्कि उसी दिशा में और जोड़ देता है।
इसीलिए प्रिज़्म से निकली किरण मुड़ी रह जाती है और उसे विचलन कोण से मापा जाता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)प्रिज़्म में अपवर्तन केवल एक बार होता है। ❌
अपवर्तन दो बार होता है—प्रवेश करते समय और निकलते समय।
प्रिज़्म में अपवर्तन दो बार होता है।