अभिनेत्र लेंस पक्ष्माभी पेशियों से जुड़ा होता है और इन पेशियों के सिकुड़ने-फैलने से लेंस की वक्रता बदल जाती है।
वक्रता बदलते ही लेंस की फोकस दूरी भी बदल जाती है—पास की वस्तु के लिए कम और दूर की वस्तु के लिए अधिक।
उत्तर: नेत्र की यह क्षमता, जिससे वह अपनी फोकस दूरी समायोजित करके निकट तथा दूरस्थ दोनों वस्तुओं को दृष्टिपटल पर फोकसित कर लेता है, समंजन क्षमता कहलाती है।
यह निकट-दृष्टि दोष है, जिसमें दूर की वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टिपटल के सामने बनता है।
इसे ठीक करने के लिए ऐसा लेंस चाहिए जो किरणों को थोड़ा फैला दे, यानी अवतल लेंस।
यहाँ दूर बिंदु 1.2 m पर है, इसलिए लेंस की फोकस दूरी f = −1.2 m होनी चाहिए।
क्षमता P = 1/f = 1/(−1.2) ≈ −0.83 D।
उत्तर: लगभग −0.83 डाइऑप्टर क्षमता का अवतल लेंस प्रयुक्त करना चाहिए।
निकट बिंदु वह अल्पतम दूरी है जिस पर रखी वस्तु को नेत्र बिना तनाव के सुस्पष्ट देख सकता है।
दूर बिंदु वह अधिकतम दूरी है जिस तक नेत्र वस्तुओं को सुस्पष्ट देख सकता है।
उत्तर: सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए निकट बिंदु लगभग 25 cm पर तथा दूर बिंदु अनंत पर होता है।
उसे दूर की वस्तु धुँधली दिखती है, जबकि पास की वस्तु साफ दिखती है।
यह निकट-दृष्टि दोष है, जिसमें दूर की वस्तु का प्रतिबिंब दृष्टिपटल के सामने बन जाता है।
इसका कारण नेत्र गोलक का लंबा हो जाना अथवा अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अधिक हो जाना है।
उत्तर: यह विद्यार्थी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित है और इसे उचित क्षमता के अवतल लेंस वाले चश्मे से संशोधित किया जा सकता है।