सही विकल्प: (D) 25
तार को पाँच बराबर भागों में काटने पर हर टुकड़े की लंबाई l/5 रह जाती है, इसलिए हर टुकड़े का प्रतिरोध R/5 होगा।
पाँच बराबर प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर R′ = (R/5)/5 = R/25।
इसलिए R/R′ = 25। सही विकल्प (D)।
सही विकल्प: (B) IR²
विद्युत शक्ति के तीन रूप हैं—P = VI, P = I²R और P = V²/R।
IR² इनमें से कोई नहीं है। सही विकल्प (B)।
सही विकल्प: (D) 25 W
पहले बल्ब का प्रतिरोध निकालिए—R = V²/P = 220² ÷ 100 = 484 Ω।
प्रतिरोध लगभग नियत रहता है, इसलिए 110 V पर P = V²/R = 110² ÷ 484 = 25 W।
वोल्टता आधी होने पर शक्ति एक-चौथाई रह जाती है। सही विकल्प (D)।
सही विकल्प: (C) 1 : 4
दोनों तारों का प्रतिरोध R मान लीजिए। श्रेणीक्रम में Rꜱ = 2R और पार्श्वक्रम में Rₚ = R/2।
समान विभवांतर पर ऊष्मा H = V²t/R, यानी ऊष्मा प्रतिरोध के प्रतिलोमानुपाती है।
इसलिए Hꜱ : Hₚ = (1/2R) : (2/R) = 1 : 4। सही विकल्प (C)।
वोल्टमीटर को उन्हीं दो बिंदुओं के बीच जोड़ना होता है जिनका विभवांतर मापना है।
इसके लिए उसे उन बिंदुओं के पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है।
वोल्टमीटर का अपना प्रतिरोध बहुत अधिक होता है, जिससे वह परिपथ की धारा को लगभग प्रभावित नहीं करता।
उत्तर: वोल्टमीटर को सदा पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है, जबकि ऐमीटर को श्रेणीक्रम में।
त्रिज्या r = 0.25 mm = 0.25 × 10⁻³ m, इसलिए अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A = πr² = 3.14 × (0.25 × 10⁻³)² ≈ 1.96 × 10⁻⁷ m²।
R = ρl/A को पलटने पर l = RA/ρ।
मान रखने पर l = (10 × 1.96 × 10⁻⁷) ÷ (1.6 × 10⁻⁸) ≈ 122.5 m।
अब व्यास दोगुना करने पर त्रिज्या भी दोगुनी हो जाएगी और क्षेत्रफल चार गुना।
R = ρl/A में A चार गुना होने पर प्रतिरोध एक-चौथाई रह जाएगा।
उत्तर: लगभग 122.5 मीटर लंबा तार चाहिए; दोगुने व्यास का तार लेने पर उसी लंबाई का प्रतिरोध घटकर एक-चौथाई, यानी 2.5 Ω रह जाएगा।