दिया है V = 12 V और I = 2.5 mA = 2.5 × 10⁻³ A।
ओम के नियम से R = V/I।
R = 12 ÷ (2.5 × 10⁻³) = 4800 Ω।
उत्तर: प्रतिरोधक का प्रतिरोध 4800 ओम, यानी 4.8 किलो-ओम है।
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों का योग है—Rꜱ = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 Ω।
परिपथ की कुल धारा I = V/Rꜱ = 9 ÷ 13.4 ≈ 0.67 A।
श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों से एक ही धारा प्रवाहित होती है।
उत्तर: 12 Ω के प्रतिरोधक से भी लगभग 0.67 ऐम्पियर धारा प्रवाहित होगी।
आवश्यक तुल्य प्रतिरोध Rₚ = V/I = 220 ÷ 5 = 44 Ω।
n बराबर प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर Rₚ = R/n होता है।
इसलिए 44 = 176/n, यानी n = 4।
उत्तर: 176 Ω के चार प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में संयोजित करना होगा।
एक बल्ब द्वारा ली गई धारा I = P/V = 10 ÷ 220 = 1/22 A।
पार्श्वक्रम में कुल धारा सभी बल्बों की धाराओं का योग होती है।
इसलिए n × (1/22) = 5, यानी n = 110।
उत्तर: अधिकतम 110 बल्ब पार्श्वक्रम में संयोजित किए जा सकते हैं।
I को x-अक्ष पर और V को y-अक्ष पर लेकर बिंदु अंकित कीजिए; सभी बिंदु लगभग एक सरल रेखा पर आएँगे, जो ओम के नियम की पुष्टि करता है।
सरल रेखा का ढाल ही प्रतिरोध देता है, क्योंकि V = IR।
किन्हीं दो बिंदुओं से ढाल निकालिए—जैसे (0.5, 1.6) और (4.0, 13.2)।
R = (13.2 − 1.6) ÷ (4.0 − 0.5) = 11.6 ÷ 3.5 ≈ 3.3 Ω।
उत्तर: प्रतिरोधक का प्रतिरोध लगभग 3.3 ओम है।
(i) दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़िए—उनका तुल्य प्रतिरोध 6/2 = 3 Ω होगा।
अब इस 3 Ω के साथ तीसरे 6 Ω प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में जोड़िए, जिससे 3 + 6 = 9 Ω मिल जाएगा।
(ii) दो प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़िए—उनका तुल्य प्रतिरोध 6 + 6 = 12 Ω होगा।
अब इस 12 Ω के साथ तीसरे 6 Ω प्रतिरोधक को पार्श्वक्रम में जोड़िए—1/R = 1/12 + 1/6 = 3/12, इसलिए R = 4 Ω।
उत्तर: (i) दो पार्श्वक्रम में और तीसरा उनके श्रेणीक्रम में; (ii) दो श्रेणीक्रम में और तीसरा उनके पार्श्वक्रम में।