← अध्ययनविद्युत धारा का तापीय प्रभाव और उसके अनुप्रयोग
आज क्या सीखेंगेजूल के तापन नियम से ऊष्मा निकालना और उसके उपयोग बताना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)हीटर का तार लाल हो जाता है, पर उसी हीटर की डोरी ठंडी बनी रहती है।
दोनों में एक ही धारा बह रही है—फर्क प्रतिरोध का है।
🧠 समझिए (Understand)जब किसी प्रतिरोधक से धारा प्रवाहित होती है तो स्रोत की ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा में बदल जाता है; इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।
जूल का तापन नियम कहता है कि उत्पन्न ऊष्मा H = I²Rt होती है, यानी ऊष्मा धारा के वर्ग, प्रतिरोध तथा समय के अनुक्रमानुपाती है।
विद्युत इस्तरी, टोस्टर, हीटर तथा गीजर इसी प्रभाव पर काम करते हैं। इनके तापन अवयव मिश्रातु, जैसे नाइक्रोम के बनाए जाते हैं, क्योंकि मिश्रातु की प्रतिरोधकता अधिक होती है और वह उच्च ताप पर शीघ्र ऑक्सीकृत नहीं होती।
विद्युत बल्ब में तंतु प्रायः टंगस्टन का ही बनाया जाता है, क्योंकि उसका गलनांक बहुत ऊँचा, लगभग 3380 °C है और उसकी प्रतिरोधकता भी अधिक है, इसलिए वह बिना पिघले श्वेत-तप्त होकर प्रकाश देता है।
विद्युत फ्यूज़ भी इसी प्रभाव पर काम करता है। यह कम गलनांक वाली मिश्रातु का छोटा तार होता है, जो निर्धारित सीमा से अधिक धारा बहने पर पिघलकर परिपथ तोड़ देता है और उपकरणों को बचा लेता है।
हीटर की डोरी उत्तप्त नहीं होती, क्योंकि उसका प्रतिरोध तापन अवयव की तुलना में बहुत कम होता है; H = I²Rt में समान धारा होने पर कम प्रतिरोध में कम ऊष्मा बनती है।
सूत्र (Formula)H = I² R t
✍️ कैसे करें (How to solve)- पहले I, R और t लिखिए; समय सेकंड में।
- फिर H = I²Rt में मान रखिए।
- ऊष्मा की दर पूछी हो तो H को t से भाग दीजिए, यानी P = I²R।
उदाहरण 1 (Example 1) — विद्युत इस्तरी में ऊष्मा20 Ω प्रतिरोध की कोई विद्युत इस्तरी 5 A धारा लेती है। 30 s में उत्पन्न ऊष्मा परिकलित कीजिए।
दिया है I = 5 A, R = 20 Ω और t = 30 s।
जूल के नियम से H = I²Rt।
मान रखने पर H = 5² × 20 × 30 = 25 × 20 × 30।
H = 15000 J, यानी 30 सेकंड में 15 किलोजूल ऊष्मा उत्पन्न होती है।
उदाहरण 2 (Example 2) — हीटर की डोरी ठंडी क्योंकिसी विद्युत हीटर की डोरी क्यों उत्तप्त नहीं होती जबकि उसका तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है?
डोरी और तापन अवयव श्रेणीक्रम में हैं, इसलिए दोनों से एक ही धारा बहती है।
डोरी कॉपर की बनी होती है, जिसकी प्रतिरोधकता बहुत कम है, जबकि तापन अवयव नाइक्रोम का होता है, जिसकी प्रतिरोधकता बहुत अधिक है।
H = I²Rt के अनुसार समान धारा और समय पर ऊष्मा प्रतिरोध के अनुक्रमानुपाती होती है।
इसीलिए अधिक प्रतिरोध वाला तापन अवयव उत्तप्त हो जाता है और कम प्रतिरोध वाली डोरी ठंडी बनी रहती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)ऊष्मा धारा के अनुक्रमानुपाती होती है। ❌
ऊष्मा धारा के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है; धारा दोगुनी होने पर ऊष्मा चार गुनी हो जाती है।
H = I²Rt
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।
अगला विषय (Next topic): विद्युत शक्ति और विद्युत ऊर्जा →← पिछला विषय (Previous topic): प्रश्नावली 12.4