📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)एक ही तार पर बैटरी के सेल बढ़ाते जाइए—हर बार धारा उसी अनुपात में बढ़ती जाती है।
यही नियमितता जी० एस० ओम ने 1827 में पकड़ी थी।
🧠 समझिए (Understand)ओम का नियम कहता है कि किसी धातु के तार के सिरों के बीच विभवांतर उसमें प्रवाहित विद्युत धारा के अनुक्रमानुपाती होता है, बशर्ते उसका ताप समान रहे।
इसे V ∝ I अथवा V = IR लिखा जाता है, जहाँ नियतांक R उस चालक का प्रतिरोध कहलाता है।
प्रतिरोध (Resistance) चालक का वह गुणधर्म है जो उसमें इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह का विरोध करता है और इस प्रकार धारा के परिमाण को नियंत्रित करता है।
प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है। यदि किसी चालक के सिरों पर 1 V विभवांतर लगाने पर उसमें 1 A धारा बहे तो उसका प्रतिरोध 1 ओम है।
V और I के बीच खींचा गया ग्राफ एक सरल रेखा होता है और उसका ढाल ही प्रतिरोध देता है।
समान विभवांतर पर प्रतिरोध बढ़ाने से धारा घट जाती है, क्योंकि I = V/R।
परिपथ में धारा नियंत्रित करने के लिए धारा नियंत्रक, यानी परिवर्ती प्रतिरोध का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — अज्ञात प्रतिरोधकिसी अज्ञात प्रतिरोध के सिरों से 12 V की बैटरी संयोजित करने पर परिपथ में 2.5 mA धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोध परिकलित कीजिए।
दिया है V = 12 V और I = 2.5 mA, जिसे ऐम्पियर में बदलने पर I = 2.5 × 10⁻³ A मिलता है।
ओम के नियम से R = V/I।
मान रखने पर R = 12 ÷ (2.5 × 10⁻³) = 4800 Ω।
प्रतिरोधक का प्रतिरोध 4800 ओम, यानी 4.8 किलो-ओम है।
उदाहरण 2 (Example 2) — विभवांतर आधा करने परकिसी वैद्युत अवयव के सिरों के बीच विभवांतर को आधा कर दिया जाए और प्रतिरोध नियत रहे, तो धारा में क्या परिवर्तन होगा?
ओम के नियम से I = V/R, यानी नियत प्रतिरोध पर धारा विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है।
विभवांतर आधा होने पर धारा भी उसी अनुपात में आधी हो जाएगी।
विद्युत धारा घटकर आधी रह जाएगी।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)ओम का नियम हर परिस्थिति में लागू होता है। ❌
यह नियम तभी लागू होता है जब चालक का ताप समान बना रहे।
ओम का नियम नियत ताप की शर्त के साथ लागू होता है।