पहला उपाय विद्युत फ्यूज़ है, जो अतिभारण अथवा लघुपथन के समय पिघलकर परिपथ तोड़ देता है और साधित्रों को क्षति से बचाता है।
दूसरा उपाय भूसंपर्क तार है, जो धातु के आवरण में हुए धारा-क्षरण को भूमि तक पहुँचा देता है।
उत्तर: विद्युत फ्यूज़ तथा भूसंपर्कण—ये दो मुख्य सुरक्षा उपाय हैं।
तंदूर द्वारा ली जाने वाली धारा I = P/V = 2000 ÷ 220 ≈ 9.1 A होगी।
परिपथ का अनुमतांक केवल 5 A है, इसलिए तंदूर उससे कहीं अधिक धारा खींचेगा और परिपथ अतिभारित हो जाएगा।
इतनी अधिक धारा बहने से तार गर्म होने लगेंगे।
उत्तर: परिपथ में लगा फ्यूज़ पिघल जाएगा और परिपथ टूट जाएगा, जिससे आग लगने जैसी दुर्घटना टल जाएगी।
एक ही सॉकेट से बहुत-से विद्युत साधित्र एक साथ नहीं जोड़ने चाहिए।
अधिक शक्ति वाले साधित्र, जैसे हीटर और तंदूर, एक साथ नहीं चलाने चाहिए।
तारों का विद्युतरोधन क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें तुरंत बदल देना चाहिए, क्योंकि इससे लघुपथन हो सकता है।
उत्तर: हर परिपथ में उचित अनुमतांक का फ्यूज़ अवश्य लगाना चाहिए—यही अतिभारण से बचाव का सबसे भरोसेमंद उपाय है।