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विद्युत जनित्र तथा ac और dc में अंतर

आज क्या सीखेंगे

जनित्र की कार्यविधि और दोनों प्रकार की धारा में अंतर बताना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
मोटर में बिजली डालिए तो कुंडली घूमती है। जनित्र में कुंडली घुमाइए तो बिजली मिलती है।
दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं—बस दिशा उलटी है।
🧠 समझिए (Understand)
विद्युत जनित्र वैद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर काम करता है और यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।
इसमें एक घूर्णी आयताकार कुंडली ABCD किसी स्थायी चुंबक के दो ध्रुवों के बीच रखी जाती है। कुंडली के दो सिरे दो वलयों से संयोजित होते हैं, जिन पर दो स्थिर चालक ब्रुश दबाकर रखे जाते हैं।
कुंडली की धुरी को यांत्रिक रूप से घुमाने पर उसकी भुजाएँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती हैं, जिससे उनमें धारा प्रेरित हो जाती है; ब्रुशों के बाहरी सिरे बाह्य परिपथ से जुड़े होते हैं।
हर आधे घूर्णन के बाद दोनों भुजाओं की स्थिति बदल जाती है, इसलिए उनमें प्रेरित धारा की दिशा भी बदल जाती है।
ऐसी विद्युत धारा जो समान काल-अंतरालों के बाद अपनी दिशा बदल लेती है, प्रत्यावर्ती धारा (ac) कहलाती है और इसे उत्पन्न करने वाली युक्ति ac जनित्र कहलाती है।
दिष्ट धारा (dc) प्राप्त करने के लिए सर्पी वलयों के स्थान पर विभक्त वलय प्रकार का दिक्परिवर्तक लगाया जाता है, जिससे बाह्य परिपथ में धारा सदा एक ही दिशा में बहती है।
भारत में उत्पादित प्रत्यावर्ती धारा हर 1/100 सेकंड के बाद अपनी दिशा उत्क्रमित करती है, इसलिए उसकी आवृत्ति 50 Hz होती है।
dc की तुलना में ac का एक बड़ा लाभ यह है कि विद्युत शक्ति को सुदूर स्थानों तक बिना अधिक ऊर्जा क्षय के भेजा जा सकता है।
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले तय कीजिए कि युक्ति ऊर्जा किस रूप से किस रूप में बदल रही है।
  2. फिर देखिए वलय किस प्रकार के हैं—सर्पी या विभक्त।
  3. सर्पी वलय हों तो ac, विभक्त वलय हों तो dc।
उदाहरण 1 (Example 1) — ac और dc जनित्र में अंतर
ac जनित्र तथा dc जनित्र में मूलभूत अंतर क्या है?
दोनों का सिद्धांत एक ही है—वैद्युतचुंबकीय प्रेरण; अंतर केवल वलयों का है।
ac जनित्र में दो सर्पी वलय होते हैं, इसलिए हर आधे घूर्णन पर बाह्य परिपथ में धारा की दिशा बदलती रहती है।
dc जनित्र में विभक्त वलय प्रकार का दिक्परिवर्तक होता है, जिससे बाह्य परिपथ में धारा सदा एक ही दिशा में बहती है।
इसलिए मूलभूत अंतर यही है कि ac जनित्र में सर्पी वलय होते हैं जबकि dc जनित्र में दिक्परिवर्तक।
उदाहरण 2 (Example 2) — ac और dc के स्रोत
दिष्ट धारा तथा प्रत्यावर्ती धारा के कुछ स्रोतों के नाम लिखिए।
दिष्ट धारा के स्रोत हैं—शुष्क सेल, बटन सेल, कार की बैटरी तथा dc जनित्र।
प्रत्यावर्ती धारा के स्रोत हैं—ac जनित्र तथा घरों में आने वाली विद्युत आपूर्ति, जो विद्युत शक्ति संयंत्रों से आती है।
भारत में घरेलू आपूर्ति 220 V की प्रत्यावर्ती धारा है, जिसकी आवृत्ति 50 Hz है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
जनित्र विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है। ❌
यह काम मोटर का है; जनित्र इसका उलटा करता है।
जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

विद्युत धारा उत्पन्न करने की युक्ति को क्या कहते हैं?

सवाल 2

भारत में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति कितनी है?

सवाल 3

ac जनित्र में कौन-से वलय होते हैं?
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