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जैवमात्रा और पवन ऊर्जा

आज क्या सीखेंगे

बायोगैस संयंत्र और पवन ऊर्जा फार्म की कार्यविधि तथा सीमाएँ बताना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
गोबर को सीधे जलाइए तो धुआँ भी मिलेगा और ऊष्मा भी कम।
पर उसे संयंत्र में डालकर सड़ने दीजिए तो वही गोबर नीली लौ वाली गैस दे देता है, और खाद अलग से।
🧠 समझिए (Understand)
पौधों तथा जंतुओं से प्राप्त ईंधन जैवमात्रा (Biomass) कहलाते हैं, जैसे लकड़ी, गोबर के उपले तथा कृषि अवशेष।
लकड़ी को वायु की सीमित आपूर्ति में जलाकर चारकोल बनाया जाता है, जो धुआँ रहित होता है और उसका कैलोरी मान लकड़ी से अधिक होता है।
बायोगैस संयंत्र में गोबर तथा जल का घोल पाचित्र में भरा जाता है, जहाँ अवायवीय सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उसका अपघटन करते हैं।
इस अपघटन से बनी गैस में मुख्यतः मेथैन होती है, लगभग 75 प्रतिशत तक, और यही उसे उत्तम ईंधन बनाती है।
बायोगैस धुआँ रहित जलती है, उसका कैलोरी मान उच्च है, और बची हुई स्लरी नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस से भरपूर उत्तम खाद होती है।
इसका एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह मल-मूत्र तथा जैव अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान का उपाय बन जाती है।
पवन ऊर्जा में वायु की गतिज ऊर्जा से पवनचक्की के ब्लेड घुमाए जाते हैं; अनेक पवनचक्कियाँ एक साथ लगाकर पवन ऊर्जा फार्म बनाया जाता है।
पवन ऊर्जा फार्म की सीमाएँ भी हैं—यह केवल उन्हीं स्थानों पर लगाया जा सकता है जहाँ वर्ष भर पवन चलती हो और उसकी चाल कम से कम 15 km/h हो; इसके लिए विशाल भूमि चाहिए और स्थापन की लागत अधिक है।
बायोगैस संयंत्रगोबर + जलका घोलपाचित्रऑक्सीजन के बिनासूक्ष्मजीव अपघटनबायोगैसमुख्यतः CH₄बची स्लरीउत्तम खादएक ही प्रक्रिया स्वच्छ ईंधन और पोषक खाद दोनों देती है।
पाचित्र में ऑक्सीजन के बिना अपघटन से मेथैन-समृद्ध गैस बनती है और बची स्लरी खाद बनती है।
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले देखिए ऊर्जा का स्रोत क्या है—जैव पदार्थ या बहती वायु।
  2. फिर उसकी कार्यविधि एक-दो वाक्यों में लिखिए।
  3. अंत में लाभ और सीमाएँ अलग-अलग लिखिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — बायोगैस उत्तम ईंधन क्यों है
गोबर गैस को उत्तम ईंधन क्यों माना जाता है?
इसमें लगभग तीन-चौथाई भाग मेथैन होती है, इसलिए इसका कैलोरी मान उच्च है।
यह धुआँ रहित जलती है, इसलिए रसोई में वायु प्रदूषण नहीं होता।
इसमें बची हुई स्लरी नाइट्रोजन तथा फॉस्फोरस से भरपूर खाद होती है।
साथ ही यह जैव अपशिष्ट तथा मल-मूत्र के सुरक्षित निपटान का भी उपाय है—इसीलिए इसे उत्तम ईंधन माना जाता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — पवन ऊर्जा की सीमाएँ
पवनों से ऊर्जा निष्कर्षित करने की सीमाएँ लिखिए।
पवन ऊर्जा फार्म केवल उन्हीं स्थानों पर लगाया जा सकता है जहाँ वर्ष भर पवन चलती रहती हो।
टरबाइन चलाने योग्य ऊर्जा के लिए पवन की चाल कम से कम 15 km/h होनी चाहिए।
बड़ी मात्रा में विद्युत के लिए विशाल भूमि चाहिए और स्थापन की लागत बहुत अधिक है।
इसके अलावा आँधी-तूफान में पवनचक्की क्षतिग्रस्त हो सकती है, इसलिए रख-रखाव का खर्च भी लगातार लगता रहता है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
बायोगैस संयंत्र में ऑक्सीजन की उपस्थिति में अपघटन होता है। ❌
अपघटन अवायवीय सूक्ष्मजीवों द्वारा, ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है।
बायोगैस का बनना एक अवायवीय प्रक्रिया है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

बायोगैस का मुख्य अवयव कौन-सा है?

सवाल 2

पवन ऊर्जा फार्म के लिए पवन की न्यूनतम चाल कितनी होनी चाहिए?

सवाल 3

निम्न में से कौन जैवमात्रा ऊर्जा स्रोत का उदाहरण नहीं है?
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