📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)कोयला करोड़ों वर्ष पहले दबे हुए पेड़ों से बना था।
हम उसे कुछ ही सौ वर्षों में जला देंगे—और वह फिर से नहीं बनेगा।
🧠 समझिए (Understand)कोयला तथा पेट्रोलियम जीवाश्मी ईंधन (Fossil fuels) हैं, जो करोड़ों वर्षों में मृत जीवों के अवशेषों से बने हैं और अब केवल सीमित भंडार ही शेष हैं।
ये अनवीकरणीय स्रोत हैं, इसलिए इन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है—इसी चिंता से ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की खोज आरंभ हुई।
जीवाश्मी ईंधन जलाने से कार्बन, नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड निकलते हैं, जो वायु को प्रदूषित करते हैं और अम्ल वर्षा का कारण बनते हैं।
इनके जलने से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड हरितगृह प्रभाव बढ़ाकर भूमंडलीय तापन में योगदान करती है।
तापीय विद्युत संयंत्र में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला अथवा पेट्रोलियम जलाकर जल को भाप में बदला जाता है; यह भाप टरबाइन घुमाती है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
ऐसे संयंत्र प्रायः कोयला अथवा तेल क्षेत्रों के निकट ही लगाए जाते हैं, क्योंकि ईंधन के परिवहन की तुलना में विद्युत संचरण कहीं सरल है।
जल विद्युत संयंत्र में नदी पर बाँध बनाकर जल एकत्र किया जाता है; ऊँचाई पर संचित जल की स्थितिज ऊर्जा नीचे गिरते समय गतिज ऊर्जा में बदलती है और टरबाइन घुमा देती है।
जल विद्युत नवीकरणीय है, क्योंकि वर्षा जल को फिर भर देती है, और इससे कोई हानिकारक उत्सर्जन भी नहीं होता।
पर बाँधों से समस्याएँ भी हैं—बड़े कृषि क्षेत्र तथा मानव बस्तियाँ जलमग्न हो जाती हैं, लोगों का विस्थापन होता है, पारितंत्र नष्ट होते हैं, और जलमग्न वनस्पति के अवायवीय अपघटन से मेथैन निकलती है।
उदाहरण 1 (Example 1) — जीवाश्मी ईंधन की हानियाँजीवाश्मी ईंधन की क्या हानियाँ हैं?
ये जलने पर कार्बन, नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड छोड़ते हैं, जो वायु प्रदूषण और अम्ल वर्षा का कारण बनते हैं।
इनसे निकली कार्बन डाइऑक्साइड हरितगृह प्रभाव बढ़ाकर भूमंडलीय तापन में योगदान करती है।
ये अनवीकरणीय हैं और करोड़ों वर्षों में बने हैं, इसलिए इनके भंडार एक दिन समाप्त हो जाएँगे।
इन्हीं कारणों से हमें ऊर्जा के वैकल्पिक तथा स्वच्छ स्रोतों की ओर बढ़ना पड़ रहा है।
उदाहरण 2 (Example 2) — तापीय और जल विद्युत में अंतरदोनों संयंत्रों में टरबाइन ही घूमता है—फिर अंतर कहाँ है?
तापीय संयंत्र में ईंधन जलाकर भाप बनाई जाती है और वही भाप टरबाइन घुमाती है; यहाँ ईंधन खर्च होता है और प्रदूषण भी होता है।
जल विद्युत संयंत्र में बाँध में संचित जल ऊँचाई से गिरकर सीधे टरबाइन घुमाता है; यहाँ कोई ईंधन नहीं जलता।
इसलिए जल विद्युत नवीकरणीय और प्रदूषण-मुक्त है, यद्यपि बाँध बनाने से अपनी अलग समस्याएँ पैदा होती हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)जल विद्युत संयंत्र पूरी तरह समस्या-मुक्त है। ❌
बाँधों से विस्थापन, पारितंत्र की क्षति और जलमग्न वनस्पति से मेथैन जैसी समस्याएँ जुड़ी हैं।
जल विद्युत नवीकरणीय जरूर है, पर उसकी भी अपनी कीमत है।