स्कूल में मास्टर जी ने कहा: '1 से 100 तक सब संख्याएँ जोड़ो।' एक बच्चे ने कुछ ही सेकंड में जवाब बता दिया।
उसने यह सूत्र पहचान लिया था, जो हर ऐसे योग में काम आता है।
प्राकृत, विषम और क्रमागत संख्याओं का योग — नियम समझकर हल और उसकी जाँच करना।
प्रथम n प्राकृत या विषम संख्याएँ भी A.P. हैं। उनकी शुरुआत और अंतर से छोटे सूत्र बनते हैं।
1 से n तक का योग = n(n + 1)/2; प्रथम n विषम संख्याओं का योग = n²; क्रमागत संख्याओं का योग = पदों की संख्या/2 × (पहला + अंतिम)।
n = 100, योग = 100 × 101/2
योग = 5050
प्रथम n विषम संख्याओं का अंतिम पद 2n − 1 है, n नहीं।
प्रथम n प्राकृत या विषम संख्याएँ भी A.P. हैं। उनकी शुरुआत और अंतर से छोटे सूत्र बनते हैं।
प्रथम n पदों का योग Sₙ = n/2[2a + (n − 1)d]। अंतिम पद l पता हो, तो Sₙ = n/2(a + l)।
पदों की संख्या = 45 − 11 + 1 = 35
योग = 35/2 × (11 + 45) = 35 × 28 = 980
योग = 980
प्रथम n विषम संख्याओं का अंतिम पद 2n − 1 है, n नहीं।
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।