📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)कॉपर सल्फेट के नीले क्रिस्टल बिल्कुल सूखे दिखते हैं। पर उन्हें सूखी परखनली में गर्म कीजिए—परखनली की दीवार पर पानी की बूँदें दिखेंगी और क्रिस्टल सफेद पड़ जाएँगे।
अब उन्हीं सफेद क्रिस्टलों पर दो-तीन बूँद पानी डालिए—नीला रंग फिर लौट आता है।
🧠 समझिए (Understand)क्रिस्टलन जल (Water of crystallisation) किसी लवण की एक सूत्र इकाई से जुड़े जल अणुओं की निश्चित संख्या है।
कॉपर सल्फेट की एक सूत्र इकाई में पाँच जल अणु होते हैं, इसलिए इसका सूत्र CuSO₄·5H₂O है। गर्म करने पर यही जल निकल जाता है और लवण सफेद हो जाता है।
जिप्सम में दो जल अणु होते हैं, इसलिए उसका सूत्र CaSO₄·2H₂O है।
जिप्सम को 373 K पर गर्म करने पर वह जल खोकर कैल्सियम सल्फेट अर्धहाइड्रेट बन जाता है, जिसे प्लास्टर ऑफ पेरिस (CaSO₄·½H₂O) कहते हैं।
आधा जल अणु इसलिए लिखा जाता है क्योंकि CaSO₄ की दो सूत्र इकाइयाँ मिलकर एक जल अणु साझा करती हैं।
प्लास्टर ऑफ पेरिस सफेद चूर्ण है। जल मिलाते ही यह फिर जिप्सम बनकर कठोर ठोस पिंड में बदल जाता है। इसीलिए डॉक्टर टूटी हड्डी को सही स्थिति में रखने के लिए इसका प्रयोग करते हैं; खिलौने, सजावट और सतह चिकनी करने में भी यह काम आता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — कॉपर सल्फेट को गर्म करनानीले क्रिस्टलों को सूखी परखनली में गर्म किया गया।
परखनली में पानी की बूँदें दिखीं और क्रिस्टल सफेद हो गए।
ये बूँदें क्रिस्टलन जल की हैं, जो गर्म करने पर बाहर निकल आया।
CuSO₄·5H₂O गर्म करने पर जल खोकर सफेद CuSO₄ बन जाता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — प्लास्टर ऑफ पेरिस का भंडारणप्लास्टर ऑफ पेरिस को नमी-रोधी डिब्बे में क्यों रखते हैं?
जल मिलते ही यह जिप्सम बनकर कठोर हो जाता है।
हवा की नमी भी यही काम कर देगी और चूर्ण जमकर बेकार हो जाएगा।
नमी से बचाने के लिए इसे वायुरुद्ध, नमी-रोधी डिब्बे में रखते हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)Na₂CO₃·10H₂O गीला होता है क्योंकि उसमें जल लिखा है। ❌
क्रिस्टलन जल रासायनिक रूप से जुड़ा होता है; क्रिस्टल छूने में सूखे ही लगते हैं।
क्रिस्टलन जल लवण की संरचना का भाग है, ऊपर लगी नमी नहीं।