📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)चाँदी के बर्तन कुछ समय बाद काले पड़ जाते हैं, ताँबे पर हरी परत आ जाती है और लोहे पर भूरी परतदार जंग चढ़ जाती है।
पर जंग हर हाल में नहीं लगती। तीन परखनलियों का एक सीधा प्रयोग बता देता है कि उसके लिए क्या-क्या चाहिए।
🧠 समझिए (Understand)संक्षारण (Corrosion) में धातु की सतह वातावरण के प्रभाव से धीरे-धीरे नष्ट होती है।
चाँदी हवा की सल्फर से अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड की काली परत बना लेती है।
ताँबा हवा की नम कार्बन डाइऑक्साइड से अभिक्रिया करके अपनी चमकदार भूरी सतह खोकर हरी परत ले लेता है; यह हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट है।
लोहा लंबे समय तक नम हवा में रहने पर भूरे परतदार पदार्थ की परत ले लेता है, जिसे जंग (Rust) कहते हैं।
तीन परखनलियों के प्रयोग में: A में साधारण जल और हवा दोनों हैं—यहाँ जंग लगती है। B में उबला आसुत जल है और ऊपर तेल की परत, जो हवा को घुलने से रोकती है—यहाँ जंग नहीं लगती। C में निर्जल कैल्सियम क्लोराइड है, जो हवा की नमी सोख लेता है—यहाँ भी जंग नहीं लगती।
निष्कर्ष साफ है: जंग लगने के लिए हवा और जल, दोनों का एक साथ होना ज़रूरी है।
उदाहरण 1 (Example 1) — परखनली B में जंग क्यों नहीं लगीइसमें उबला आसुत जल था और ऊपर तेल की परत।
जल उबालने से उसमें घुली हवा निकल जाती है।
तेल जल के ऊपर तैरकर बाहर की हवा को जल में घुलने से रोकता है।
जल तो है पर हवा नहीं, इसलिए जंग नहीं लगी।
उदाहरण 2 (Example 2) — परखनली C में जंग क्यों नहीं लगीइसमें केवल निर्जल कैल्सियम क्लोराइड रखकर कॉर्क लगा दिया गया।
निर्जल कैल्सियम क्लोराइड हवा में मौजूद नमी सोख लेता है।
कील सूखी हवा के संपर्क में है, जल नहीं है।
हवा तो है पर जल नहीं, इसलिए जंग नहीं लगी।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)जंग लगने के लिए केवल नमी काफी है। ❌
परखनली B में जल था फिर भी जंग नहीं लगी, क्योंकि हवा नहीं थी।
जंग के लिए हवा और जल दोनों चाहिए।