सही विकल्प: (B) 7 सहसंयोजक आबंध हैं
छह हाइड्रोजन परमाणु कार्बन से जुड़े हैं, जिससे छह C−H आबंध बनते हैं।
इनके अलावा दोनों कार्बन के बीच एक C−C आबंध भी है।
कुल मिलाकर 6 + 1 = 7 सहसंयोजक आबंध होते हैं।
सही विकल्प: (C) कीटोन
नाम के अंत में '-ओन' आने का अर्थ है कि यौगिक में कीटोन समूह है।
कीटोन में कार्बोनिल समूह >C=O शृंखला के भीतर वाले कार्बन पर होता है।
सही विकल्प: (B) ईंधन पूरी तरह से नहीं जल रहा है
काली परत बिना जले कार्बन की होती है, जो अपूर्ण दहन से बनती है।
इसका अर्थ है कि ईंधन को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल रही।
कार्बन के बाहरी कोश में चार इलेक्ट्रॉन हैं और उसे उत्कृष्ट गैस विन्यास पाने के लिए चार और चाहिए।
तीन हाइड्रोजन परमाणु उसके साथ एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं और क्लोरीन भी एक इलेक्ट्रॉन साझा करती है।
इस तरह कार्बन के चारों इलेक्ट्रॉन साझेदारी में लग जाते हैं और उसे आठ इलेक्ट्रॉन का विन्यास मिल जाता है; क्लोरीन का भी अष्टक पूरा हो जाता है।
उत्तर: CH₃Cl में चारों आबंध इलेक्ट्रॉन की साझेदारी से बने हैं, किसी आयन के बनने से नहीं। यही सहसंयोजक आबंध की प्रकृति है।
समान प्रकार्यात्मक समूह वाले यौगिकों की वह श्रेणी, जिसमें क्रमागत सदस्यों का अंतर −CH₂− का हो, समजातीय श्रेणी कहलाती है।
क्रमागत सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में 14 u का अंतर होता है और उनके रासायनिक गुण समान रहते हैं, जबकि भौतिक गुण क्रमशः बदलते हैं।
उत्तर: उदाहरण के लिए ऐल्केन श्रेणी—CH₄, C₂H₆, C₃H₈, C₄H₁₀। इनमें हर बार एक CH₂ जुड़ता जाता है और सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂ लागू रहता है।
कार्बन और उसके यौगिक जलने पर प्रचुर मात्रा में ऊष्मा और प्रकाश मुक्त करते हैं, यानी उनका कैलोरी मान उच्च होता है।
पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने पर ये स्वच्छ लौ के साथ जलते हैं और कोई हानिकारक अवशेष नहीं छोड़ते।
ये आसानी से उपलब्ध हैं और इन्हें रखना तथा ले जाना सुविधाजनक है।
उत्तर: उच्च कैलोरी मान, स्वच्छ दहन और सहज उपलब्धता—इन्हीं कारणों से कार्बन यौगिक ईंधन के रूप में काम आते हैं।
कठोर जल में कैल्सियम और मैग्नीशियम के लवण घुले होते हैं।
साबुन पहले इन्हीं लवणों से अभिक्रिया करके अघुलनशील पदार्थ बना देता है, जिसे स्कम कहते हैं।
इसलिए झाग बनने के लिए साबुन बचता ही नहीं और अधिक साबुन लगाना पड़ता है।
उत्तर: कठोर जल में साबुन से पहले स्कम बनता है और झाग बहुत कम बनता है; झाग तभी बनता है जब सारे कैल्सियम-मैग्नीशियम लवण समाप्त हो जाएँ।
एथेनॉइक अम्ल CH₃COOH में एक कार्बन तीन हाइड्रोजन से जुड़ा है और दूसरा कार्बन एक ऑक्सीजन से द्वि-आबंध तथा −OH समूह से एकल आबंध बनाता है।
H₂S में सल्फर के बाहरी कोश में छह इलेक्ट्रॉन हैं; वह दो हाइड्रोजन के साथ एक-एक युग्म साझा करके अष्टक पूरा करता है और उसके दो एकाकी युग्म बचे रहते हैं।
प्रोपेनोन CH₃COCH₃ में बीच वाला कार्बन ऑक्सीजन से द्वि-आबंध बनाता है और दोनों ओर एक-एक मेथिल समूह जुड़ा रहता है।
F₂ में प्रत्येक फ्लुओरीन के बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन हैं; दोनों एक-एक इलेक्ट्रॉन साझा करके एकल आबंध बनाते हैं और हर परमाणु के पास तीन एकाकी युग्म बचते हैं।
उत्तर: चारों में आबंध इलेक्ट्रॉन की साझेदारी से बने हैं—एथेनॉइक अम्ल और प्रोपेनोन में एक द्वि-आबंध है, जबकि H₂S और F₂ में केवल एकल आबंध।
भौतिक आधार पर एथनॉल की गंध विशिष्ट और जलन-रहित होती है, जबकि एथेनॉइक अम्ल की गंध सिरके जैसी तीखी होती है। एथेनॉइक अम्ल ठंड में जम जाता है, एथनॉल नहीं।
रासायनिक आधार पर निर्णायक जाँच सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट से होती है: एथेनॉइक अम्ल डालने पर बुदबुदाहट के साथ CO₂ निकलती है, एथनॉल में कुछ नहीं होता।
लिटमस से भी अंतर दिखता है—एथेनॉइक अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देता है, जबकि एथनॉल उदासीन रहता है।
उत्तर: सबसे सरल और भरोसेमंद जाँच सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट की है; जिसमें बुदबुदाहट हो वही एथेनॉइक अम्ल है।
साबुन के अणु का एक सिरा जलरागी (आयनिक) और दूसरा जलविरागी (कार्बन शृंखला) होता है।
जल में डालने पर जलविरागी सिरे जल से दूर रहना चाहते हैं और जलरागी सिरे जल में रहना चाहते हैं।
दोनों शर्तें एक साथ तभी पूरी होती हैं जब अणु गोल घेरा बनाकर अपने जलविरागी सिरे भीतर और आयनिक सिरे बाहर कर लें—यही मिसेल है।
उत्तर: एथनॉल जैसे विलायकों में मिसेल नहीं बनेगा, क्योंकि उनमें साबुन की कार्बन शृंखला भी घुल जाती है और दोनों सिरों के बीच का अंतर ही समाप्त हो जाता है।