साबुन प्रबल क्षार और दुर्बल अम्ल से बना लवण है, इसलिए उसका जलीय विलयन क्षारीय होता है।
क्षारीय विलयन लाल लिटमस को नीला कर देता है और नीले लिटमस पर कोई प्रभाव नहीं डालता।
उत्तर: लाल लिटमस नीला हो जाएगा और नीला लिटमस नीला ही रहेगा, जिससे पता चलता है कि साबुन क्षारीय प्रकृति का है।
असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में निकैल या पैलेडियम जैसे उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़कर उसे संतृप्त बनाना हाइड्रोजनीकरण कहलाता है।
इसमें द्वि या त्रि-आबंध टूटकर एकल आबंध बन जाता है।
उत्तर: इसका मुख्य औद्योगिक अनुप्रयोग वनस्पति तेलों से वनस्पति घी बनाना है—निकैल उत्प्रेरक की उपस्थिति में असंतृप्त द्रव तेल संतृप्त होकर ठोस वसा में बदल जाता है।
संकलन अभिक्रिया केवल असंतृप्त यौगिक देते हैं, यानी जिनमें द्वि या त्रि-आबंध हो।
C₂H₆, C₃H₈ और CH₄ संतृप्त हैं, क्योंकि वे CₙH₂ₙ₊₂ के रूप में हैं।
C₃H₆ में द्वि-आबंध है और C₂H₂ में त्रि-आबंध।
उत्तर: C₃H₆ और C₂H₂ में संकलन अभिक्रिया होती है।
मक्खन में संतृप्त वसा होती है और खाना बनाने वाले तेल में असंतृप्त वसा।
असंतृप्त यौगिक ब्रोमीन जल का रंग उड़ा देते हैं, क्योंकि ब्रोमीन द्वि-आबंध पर जुड़ जाती है।
दोनों में अलग-अलग ब्रोमीन जल की कुछ बूँदें डालकर हिलाइए।
उत्तर: जिसमें ब्रोमीन जल का भूरा रंग उड़ जाए वह असंतृप्त है, यानी खाना बनाने वाला तेल; मक्खन में रंग बना रहेगा।
अधिकांश मैल तैलीय होता है और तेल जल में अघुलनशील है, इसलिए अकेला जल उसे नहीं हटा पाता।
साबुन के अणु का एक सिरा जलरागी होता है और दूसरा जलविरागी; जलविरागी सिरा तेल में घुसता है और जलरागी सिरा बाहर जल की ओर रहता है।
इस तरह तेल की बूँद चारों ओर से साबुन के अणुओं से घिर जाती है और मिसेल बन जाता है।
कपड़े को रगड़ने से मिला यांत्रिक बल इस घिरी हुई बूँद को रेशों से अलग कर देता है और वह जल में निलंबित होकर बह जाती है।
उत्तर: साबुन तेल का पायस बनाकर उसे जल में निलंबित कर देता है; मिसेल बनना और रगड़ना—दोनों मिलकर कपड़ा साफ़ करते हैं।