📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)समाज में अक्सर माँ को लड़का या लड़की होने के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है।
विज्ञान इस पर बिल्कुल साफ है—माता से सदा एक ही प्रकार का गुणसूत्र मिलता है, इसलिए निर्णय उसके हाथ में है ही नहीं।
🧠 समझिए (Understand)मानव में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं। इनमें से 22 जोड़े माता और पिता के गुणसूत्रों के पूर्ण प्रतिरूप होते हैं।
एक युग्म लिंग गुणसूत्र कहलाता है, जो सदा पूर्ण जोड़े में नहीं होता।
स्त्री में यह युग्म पूर्ण होता है और दोनों गुणसूत्र X कहलाते हैं, यानी स्त्री में XX होता है।
पुरुष में यह जोड़ा परिपूर्ण नहीं होता—एक गुणसूत्र सामान्य आकार का X होता है और दूसरा छोटा Y, यानी पुरुष में XY होता है।
सभी बच्चे, चाहे लड़का हों या लड़की, अपनी माता से X गुणसूत्र ही प्राप्त करते हैं।
जिस बच्चे को पिता से X गुणसूत्र मिलता है वह लड़की होती है और जिसे पिता से Y गुणसूत्र मिलता है वह लड़का होता है।
इसी कारण सामान्यतः आधे बच्चे लड़के और आधे लड़की होने की संभावना रहती है।
उदाहरण 1 (Example 1) — बच्चे का लिंग कैसे तय होता हैमानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?
माता में दोनों लिंग गुणसूत्र X होते हैं, इसलिए उसके हर अंड में X ही जाता है।
पिता में एक X और एक Y होता है, इसलिए उसके शुक्राणु दो प्रकार के बनते हैं—कुछ X वाले और कुछ Y वाले।
यदि X वाला शुक्राणु अंड से मिले तो संतान XX यानी लड़की होगी, और यदि Y वाला मिले तो XY यानी लड़का।
इसलिए बच्चे का लिंग पिता से मिलने वाले गुणसूत्र पर निर्भर करता है, माता पर नहीं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)बच्चे का लिंग माता पर निर्भर करता है। ❌
माता के पास केवल X गुणसूत्र है, इसलिए वह दो विकल्प दे ही नहीं सकती।
लिंग का निर्धारण पिता से मिलने वाले गुणसूत्र से होता है।