मेंडल ने लंबे और बौने मटर के पौधों का संकरण कराया और F₁ पीढ़ी के सारे पौधे लंबे निकले—बौनापन दिखाई ही नहीं दिया।
F₁ पौधों के स्वनिषेचन से बनी F₂ पीढ़ी में बौने पौधे फिर प्रकट हो गए, यानी वह लक्षण नष्ट नहीं हुआ था।
उत्तर: जो लक्षण F₁ में व्यक्त हुआ वह प्रभावी है और जो छिपा रहा वह अप्रभावी—इसी से सिद्ध हुआ कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं।
मेंडल ने गोल-हरे बीज वाले पौधों का संकरण झुर्रीदार-पीले बीज वाले पौधों से कराया; जनक केवल इन्हीं दो प्रकार के थे।
F₂ पीढ़ी में गोल-पीले तथा झुर्रीदार-हरे पौधे भी मिले, जो किसी भी जनक जैसे नहीं थे।
यदि आकृति और रंग साथ-साथ ही वंशानुगत होते, तो ये नए संयोग बन ही नहीं सकते थे।
उत्तर: नए संयोगों का मिलना ही सिद्ध करता है कि विभिन्न लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।
पुत्री का रुधिर वर्ग O है, इसलिए उसे माता और पिता दोनों से O वाला विकल्प मिला होगा।
इसका अर्थ है कि पिता में A के साथ O भी मौजूद था, फिर भी दिखा केवल A—यह संकेत करता है कि A प्रभावी और O अप्रभावी है।
पर यह केवल एक संतान की जानकारी है; निश्चित निष्कर्ष के लिए अनेक संतानों अथवा अनेक पीढ़ियों का आँकड़ा चाहिए।
उत्तर: यह सूचना अकेली पर्याप्त नहीं है, यद्यपि यह संकेत देती है कि रुधिर वर्ग A प्रभावी लक्षण है।
मानव में 23 जोड़े गुणसूत्र होते हैं, जिनमें एक जोड़ा लिंग गुणसूत्र है—स्त्री में XX और पुरुष में XY।
माता के हर अंड में X गुणसूत्र ही जाता है, जबकि पिता के शुक्राणु दो प्रकार के होते हैं—कुछ X वाले और कुछ Y वाले।
X वाला शुक्राणु अंड से मिले तो संतान XX यानी लड़की होगी, और Y वाला मिले तो XY यानी लड़का।
उत्तर: बच्चे का लिंग पिता से मिलने वाले गुणसूत्र पर निर्भर करता है, माता पर नहीं।