अवतल दर्पण पर मुख्य अक्ष के समांतर अनेक किरणें आपतित कीजिए।
परावर्तन के बाद ये सभी किरणें मुख्य अक्ष पर एक ही बिंदु पर मिल जाती हैं।
उत्तर: मुख्य अक्ष के समांतर आपतित किरणें परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के जिस बिंदु पर मिलती हैं, उसे अवतल दर्पण का मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
किसी भी गोलीय दर्पण में फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या का संबंध f = R/2 है।
यहाँ R = 20 cm दिया गया है।
f = 20/2 = 10 cm।
उत्तर: दर्पण की फोकस दूरी 10 cm है।
उत्तल दर्पण सदा छोटा प्रतिबिंब बनाता है और समतल दर्पण बराबर आकार का, इसलिए ये दोनों इस काम के नहीं हैं।
अवतल दर्पण में जब बिंब ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है, तब प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है।
उत्तर: अवतल दर्पण ऐसा प्रतिबिंब बना सकता है। इसी कारण दाढ़ी बनाने के दर्पण और दंत चिकित्सक के दर्पण के रूप में अवतल दर्पण का उपयोग होता है।
उत्तल दर्पण सदा सीधा प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए चालक को पीछे का दृश्य उलटा नहीं दिखता।
यह बाहर की ओर वक्रित होता है, इसलिए इसका दृष्टि-क्षेत्र बहुत बड़ा होता है।
समतल दर्पण की तुलना में यह चालक को अपने पीछे का कहीं बड़ा क्षेत्र दिखा पाता है।
उत्तर: सीधा प्रतिबिंब और बड़ा दृष्टि-क्षेत्र—इन्हीं दो कारणों से उत्तल दर्पण को वरीयता दी जाती है, यद्यपि उसमें प्रतिबिंब छोटा दिखाई देता है।