← अध्ययनचिह्न परिपाटी, दर्पण सूत्र और आवर्धन
आज क्या सीखेंगेचिह्न परिपाटी के अनुसार u, v, f लिखना और दर्पण सूत्र से हल निकालना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)सूत्र तो एक ही है, फिर भी उत्तर गलत क्यों आता है? लगभग हमेशा कारण एक ही होता है—चिह्न।
इसलिए सवाल हल करने से पहले हर दूरी का चिह्न लिखना ही आधी तैयारी है।
🧠 समझिए (Understand)गोलीय दर्पणों के लिए नई कार्तीय चिह्न-परिपाटी अपनाई जाती है, जिसमें दर्पण के ध्रुव को मूल बिंदु और मुख्य अक्ष को x-अक्ष मानते हैं।
बिंब सदा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है, इसलिए बिंब-दूरी u सदा ऋणात्मक होती है।
मूल बिंदु के दाईं ओर मापी गई दूरियाँ धनात्मक और बाईं ओर मापी गई ऋणात्मक मानी जाती हैं।
मुख्य अक्ष के ऊपर की ओर मापी गई ऊँचाइयाँ धनात्मक और नीचे की ओर मापी गई ऋणात्मक होती हैं।
इस परिपाटी के अनुसार अवतल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक और उत्तल दर्पण की धनात्मक होती है।
दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f बिंब-दूरी, प्रतिबिंब-दूरी तथा फोकस दूरी में संबंध दर्शाता है।
आवर्धन m प्रतिबिंब की ऊँचाई तथा बिंब की ऊँचाई का अनुपात है, और यह m = h′/h = −v/u के बराबर होता है।
आवर्धन ऋणात्मक आए तो प्रतिबिंब वास्तविक और उलटा है; धनात्मक आए तो आभासी और सीधा।
ध्रुव को मूल बिंदु मानें: बाईं ओर ऋण, दाईं ओर धन, ऊपर धन और नीचे ऋण।सूत्र (Formula)1/v + 1/u = 1/f; m = h′/h = − v/u
✍️ कैसे करें (How to solve)- पहले u, f को चिह्न सहित लिखिए और जो ज्ञात करना है उसे प्रश्नचिह्न से दिखाइए।
- फिर दर्पण सूत्र में रखकर v निकालिए।
- अंत में आवर्धन निकालकर प्रतिबिंब की प्रकृति और आकार लिखिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — अवतल दर्पण का सवालएक अवतल दर्पण 15.0 cm फोकस दूरी का है और 4.0 cm ऊँचा बिंब उससे 25.0 cm दूर रखा है। प्रतिबिंब कहाँ और कैसा बनेगा?
दिया है: h = +4.0 cm, u = −25.0 cm, f = −15.0 cm। ज्ञात करना है v और h′।
दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f, इसलिए 1/v = 1/f − 1/u = 1/(−15.0) − 1/(−25.0)।
1/v = −1/15.0 + 1/25.0 = (−5.0 + 3.0)/75.0 = −2.0/75.0, इसलिए v = −37.5 cm।
v ऋणात्मक है, यानी प्रतिबिंब दर्पण के सामने 37.5 cm दूर बनेगा और वास्तविक होगा; परदा वहीं रखना चाहिए।
आवर्धन: m = −v/u = −(−37.5)/(−25.0) = −1.5, और h′ = m × h = −1.5 × 4.0 = −6.0 cm।
h′ ऋणात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब उलटा है और उसकी ऊँचाई 6.0 cm है, यानी आवर्धित भी।
प्रतिबिंब दर्पण से 37.5 cm दूर, वास्तविक, उलटा तथा 6.0 cm ऊँचा बनेगा।
उदाहरण 2 (Example 2) — तीन गुना आवर्धित प्रतिबिंबकोई अवतल दर्पण अपने सामने 10 cm दूरी पर रखे बिंब का तीन गुना आवर्धित वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब दर्पण से कितनी दूरी पर है?
दिया है: u = −10 cm और प्रतिबिंब वास्तविक तथा तीन गुना है, इसलिए m = −3।
आवर्धन का सूत्र: m = −v/u, यानी −3 = −v/(−10)।
इससे −3 = v/10, अर्थात v = −30 cm।
ऋण चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब दर्पण के सामने उसी ओर बन रहा है, जहाँ बिंब है।
प्रतिबिंब दर्पण से 30 cm की दूरी पर, दर्पण के सामने बनेगा।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)बिंब-दूरी u को धनात्मक लिख देना। ❌
बिंब सदा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है और बाईं ओर की दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं।
u सदा ऋणात्मक लिखिए।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
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