पार्श्वक्रम में दोनों लैम्पों को पूरा 220 V मिलता है, इसलिए दोनों अपनी अनुमतांक शक्ति ही लेंगे।
कुल शक्ति P = 100 + 60 = 160 W।
धारा I = P/V = 160 ÷ 220 ≈ 0.73 A।
उत्तर: विद्युत मेंस से लगभग 0.73 ऐम्पियर धारा ली जाती है।
ऊर्जा = शक्ति × समय, और दोनों को एक ही मात्रक में लाना होगा।
टी०वी० के लिए W = 250 × 3600 = 9,00,000 J।
हीटर के लिए W = 120 × 600 = 72,000 J।
उत्तर: टी०वी० सेट में कहीं अधिक ऊर्जा उपभुक्त होती है—9 × 10⁵ J बनाम 7.2 × 10⁴ J।
ऊष्मा की दर ही शक्ति है, इसलिए यहाँ समय की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
P = I²R = 15² × 8 = 225 × 8।
P = 1800 W।
उत्तर: हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर 1800 जूल प्रति सेकंड, यानी 1800 वाट है।
पृथक कुंडली के प्रकरण में R = 24 Ω, इसलिए I = 220 ÷ 24 ≈ 9.2 A।
श्रेणीक्रम में Rꜱ = 24 + 24 = 48 Ω, इसलिए I = 220 ÷ 48 ≈ 4.6 A।
पार्श्वक्रम में Rₚ = 24/2 = 12 Ω, इसलिए I = 220 ÷ 12 ≈ 18.3 A।
उत्तर: तीनों प्रकरणों में धाराएँ क्रमशः लगभग 9.2 A, 4.6 A तथा 18.3 A होंगी—यानी पार्श्वक्रम में सबसे अधिक ऊष्मा मिलेगी।
(i) श्रेणीक्रम में Rꜱ = 1 + 2 = 3 Ω, इसलिए धारा I = 6 ÷ 3 = 2 A।
श्रेणीक्रम में 2 Ω से भी यही 2 A बहेगी, इसलिए P = I²R = 2² × 2 = 8 W।
(ii) पार्श्वक्रम में हर शाखा पर पूरा 4 V विभवांतर रहता है।
इसलिए 2 Ω प्रतिरोधक की शक्ति P = V²/R = 4² ÷ 2 = 8 W।
उत्तर: दोनों प्रकरणों में 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभुक्त शक्ति समान, यानी 8 वाट है।
(a) टंगस्टन का गलनांक बहुत ऊँचा, लगभग 3380 °C है और उसकी प्रतिरोधकता भी अधिक है, इसलिए वह बिना पिघले श्वेत-तप्त होकर प्रकाश देता है।
(b) मिश्रातुओं की प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं से अधिक होती है, उनका गलनांक ऊँचा होता है और वे उच्च ताप पर शीघ्र ऑक्सीकृत नहीं होतीं।
(c) श्रेणीक्रम में हर युक्ति को पूरा विभवांतर नहीं मिलता, सबको एक ही धारा लेनी पड़ती है, और एक युक्ति खराब होते ही पूरा परिपथ टूट जाता है।
(d) R = ρl/A के अनुसार प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के प्रतिलोमानुपाती होता है—क्षेत्रफल दोगुना होने पर प्रतिरोध आधा रह जाता है।
(e) कॉपर तथा ऐलुमिनियम की प्रतिरोधकता बहुत कम है, इसलिए संचरण में ऊर्जा की हानि कम होती है; साथ ही ये सिल्वर की तुलना में सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं।
उत्तर: पाँचों का आधार एक ही है—प्रतिरोधकता, गलनांक और परिपथ की व्यवस्था देखकर पदार्थ और संयोजन चुना जाता है।