📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)सजावटी लड़ी का एक बल्ब फ्यूज़ हो जाए तो पूरी लड़ी बुझ जाती है।
कारण यही है कि सारे बल्ब एक ही रास्ते में, यानी श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं।
🧠 समझिए (Understand)श्रेणीक्रम संयोजन में प्रतिरोधक एक के बाद एक जुड़े होते हैं और धारा के लिए केवल एक ही रास्ता होता है।
इसलिए श्रेणीक्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक से एक ही विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
बैटरी का कुल विभवांतर सभी प्रतिरोधकों के विभवांतरों के योग के बराबर होता है, यानी V = V₁ + V₂ + V₃।
इससे तुल्य प्रतिरोध मिलता है—Rꜱ = R₁ + R₂ + R₃ + …
श्रेणीक्रम का तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े व्यष्टिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है।
श्रेणीबद्ध परिपथ की एक बड़ी हानि यह है कि एक अवयव के काम करना बंद कर देने पर पूरा परिपथ टूट जाता है और शेष अवयव भी काम नहीं करते।
उदाहरण 1 (Example 1) — श्रेणीक्रम की धारा9 V की बैटरी को 0.2 Ω, 0.3 Ω, 0.4 Ω, 0.5 Ω तथा 12 Ω के प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित किया गया है। 12 Ω के प्रतिरोधक से कितनी धारा प्रवाहित होगी?
श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों का योग है—Rꜱ = 0.2 + 0.3 + 0.4 + 0.5 + 12 = 13.4 Ω।
परिपथ की कुल धारा I = V/Rꜱ = 9 ÷ 13.4 ≈ 0.67 A।
श्रेणीक्रम में हर प्रतिरोधक से एक ही धारा बहती है।
12 Ω के प्रतिरोधक से भी लगभग 0.67 A धारा ही प्रवाहित होगी।
उदाहरण 2 (Example 2) — तीन बराबर प्रतिरोधकों से 9 Ω6 Ω प्रतिरोध के तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार संयोजित करें कि प्राप्त संयोजन का प्रतिरोध 9 Ω हो?
तीनों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर 18 Ω मिलेगा, जो अधिक है; तीनों को पार्श्वक्रम में जोड़ने पर 2 Ω मिलेगा, जो कम है।
इसलिए दो प्रतिरोधकों को पार्श्वक्रम में जोड़िए—उनका तुल्य प्रतिरोध 6/2 = 3 Ω होगा।
अब इस 3 Ω के साथ तीसरे 6 Ω प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में जोड़िए।
कुल प्रतिरोध 3 + 6 = 9 Ω मिल जाएगा।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)श्रेणीक्रम में हर प्रतिरोधक पर विभवांतर समान रहता है। ❌
श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है; विभवांतर प्रतिरोध के अनुपात में बँट जाता है।
श्रेणीक्रम—धारा समान; पार्श्वक्रम—विभवांतर समान।