चालक की लंबाई पर—तार जितना लंबा होगा, प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा।
उसकी अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर—तार जितना मोटा होगा, प्रतिरोध उतना ही कम होगा।
उस पदार्थ की प्रकृति पर जिससे वह बना है, तथा उसके ताप पर भी।
उत्तर: ये सभी कारक R = ρl/A में समाए हुए हैं, जहाँ ρ उस पदार्थ की प्रतिरोधकता है।
प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर प्रतिलोमतः निर्भर करता है, यानी R = ρl/A।
मोटे तार का क्षेत्रफल अधिक है, इसलिए उसका प्रतिरोध कम होगा।
समान स्रोत से जोड़ने पर I = V/R के अनुसार कम प्रतिरोध में अधिक धारा बहेगी।
उत्तर: मोटे तार में विद्युत धारा अधिक आसानी से प्रवाहित होगी, क्योंकि उसका प्रतिरोध कम है।
ओम के नियम से I = V/R।
प्रतिरोध नियत है, इसलिए धारा विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होगी।
विभवांतर आधा होने पर धारा भी उसी अनुपात में आधी रह जाएगी।
उत्तर: विद्युत धारा घटकर आधी हो जाएगी।
मिश्रातुओं की वैद्युत प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में बहुत अधिक होती है, इसलिए H = I²Rt के अनुसार वे अधिक ऊष्मा देती हैं।
मिश्रातुएँ उच्च ताप पर शीघ्र ऑक्सीकृत नहीं होतीं, इसलिए तापन अवयव जल्दी खराब नहीं होता।
उनका गलनांक भी ऊँचा होता है, इसलिए वे तप्त होने पर पिघलती नहीं।
उत्तर: अधिक प्रतिरोधकता, उच्च गलनांक तथा ऑक्सीकरण का प्रतिरोध—इन्हीं तीन कारणों से तापन अवयव मिश्रातु के बनाए जाते हैं।
जिस पदार्थ की प्रतिरोधकता कम होगी, वह उतना ही अच्छा चालक होगा।
आयरन की प्रतिरोधकता लगभग 10.0 × 10⁻⁸ Ω m है, जबकि मर्करी की लगभग 94.0 × 10⁻⁸ Ω m।
सारणी में सबसे कम प्रतिरोधकता सिल्वर की है, लगभग 1.60 × 10⁻⁸ Ω m।
उत्तर: (a) आयरन मर्करी से अच्छा विद्युत चालक है। (b) सिल्वर सर्वश्रेष्ठ चालक है।