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वैद्युतचुंबकीय प्रेरण और फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम

आज क्या सीखेंगे

प्रेरण की परिघटना समझाना और प्रेरित धारा की दिशा निकालना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
कुंडली को गैल्वेनोमीटर से जोड़िए और चुंबक को उसकी ओर ले जाइए—सुई विक्षेपित हो जाती है।
चुंबक रुकते ही विक्षेप शून्य हो जाता है। यानी धारा गति से बनती है, चुंबक से नहीं।
🧠 समझिए (Understand)
जब किसी कुंडली तथा चुंबक के बीच आपेक्षिक गति होती है तो कुंडली में विद्युत धारा प्रेरित हो जाती है—इस परिघटना को वैद्युतचुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic induction) कहते हैं। इसकी खोज माइकेल फैराडे ने 1831 में की थी।
चुंबक को कुंडली की ओर ले जाने पर गैल्वेनोमीटर की सुई एक ओर विक्षेपित होती है और दूर ले जाने पर दूसरी ओर, यानी धारा की दिशा उलट जाती है।
चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखने पर कोई विक्षेप नहीं होता, क्योंकि तब आपेक्षिक गति ही नहीं है।
धारा प्रेरित करने के लिए यह भी पर्याप्त है कि कुंडली के पास रखी दूसरी कुंडली में बहने वाली धारा बदल दी जाए, क्योंकि इससे पहली कुंडली से जुड़ा चुंबकीय क्षेत्र बदल जाता है।
संक्षेप में, कुंडली से जुड़े चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन ही प्रेरित धारा का कारण है—चाहे वह परिवर्तन चुंबक को हिलाकर लाया जाए, कुंडली को हिलाकर, या पास की कुंडली की धारा बदलकर।
प्रेरित धारा तब अधिकतम होती है जब कुंडली की गति की दिशा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत हो।
प्रेरित धारा की दिशा फ्लेमिंग के दक्षिण-हस्त नियम से ज्ञात की जाती है—दाहिने हाथ की तर्जनी, मध्यमा तथा अँगूठे को परस्पर लंबवत फैलाइए; तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, अँगूठा चालक की गति की दिशा, और मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा दर्शाती है।
वैद्युतचुंबकीय प्रेरणNSगतिGजुड़ा चुंबकीय क्षेत्र बदले तो धारा प्रेरित होती है; गति रोकने पर धारा शून्य।
चुंबक और कुंडली के बीच आपेक्षिक गति से कुंडली से जुड़ा चुंबकीय क्षेत्र बदलता है और धारा प्रेरित होती है।
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले देखिए कि कुंडली से जुड़ा क्षेत्र बदल रहा है या नहीं।
  2. बदल रहा हो तो धारा प्रेरित होगी, वरना नहीं।
  3. दिशा के लिए फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम लगाइए।
उदाहरण 1 (Example 1) — छड़ चुंबक और कुंडली
कोई विद्युतरोधी ताँबे के तार की कुंडली गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुंबक (i) कुंडली में धकेला जाता है, (ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है, (iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है?
(i) चुंबक को कुंडली में धकेलने पर उससे जुड़ा चुंबकीय क्षेत्र बदलता है, इसलिए कुंडली में धारा प्रेरित होती है और गैल्वेनोमीटर की सुई एक ओर विक्षेपित हो जाती है।
(ii) चुंबक को बाहर खींचने पर क्षेत्र फिर बदलता है, पर विपरीत प्रकार से; इसलिए सुई दूसरी ओर विक्षेपित होती है, यानी धारा की दिशा उलट जाती है।
(iii) चुंबक स्थिर रखने पर कुंडली से जुड़ा क्षेत्र नहीं बदलता।
इसलिए तीसरी स्थिति में कोई धारा प्रेरित नहीं होगी और गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं दिखेगा।
उदाहरण 2 (Example 2) — दो पास-पास रखी कुंडलियाँ
दो वृत्ताकार कुंडली A तथा B एक-दूसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत धारा में कोई परिवर्तन करें तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत धारा प्रेरित होगी?
कुंडली A में धारा बदलने से उसके चारों ओर का चुंबकीय क्षेत्र भी बदल जाएगा।
कुंडली B पास में है, इसलिए उससे जुड़ा चुंबकीय क्षेत्र भी बदलेगा।
हाँ, कुंडली B में विद्युत धारा प्रेरित होगी, क्योंकि प्रेरण के लिए आपेक्षिक गति आवश्यक नहीं—क्षेत्र का बदलना ही पर्याप्त है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
धारा प्रेरित करने के लिए चुंबक का कुंडली के भीतर होना ही काफी है। ❌
स्थिर चुंबक से कोई धारा नहीं बनती; क्षेत्र का बदलना आवश्यक है।
क्षेत्र में परिवर्तन ही प्रेरित धारा का कारण है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की परिघटना क्या है?

सवाल 2

प्रेरित धारा की दिशा किस नियम से ज्ञात होती है?

सवाल 3

चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखने पर गैल्वेनोमीटर में क्या होगा?
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