मोटर का सिद्धांत, रचना और विभक्त वलय की भूमिका बताना।
📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
पंखा, मिक्सर, वाशिंग मशीन—सबके भीतर एक ही युक्ति घूम रही है।
और वह घूमती इसलिए है क्योंकि उसकी कुंडली की दो भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लग रहा है।
🧠 समझिए (Understand)
विद्युत मोटर एक घूर्णन युक्ति है, जिसमें विद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में रूपांतरण होता है।
इसमें विद्युतरोधी तार की एक आयताकार कुंडली ABCD किसी प्रबल चुंबक के दो ध्रुवों के बीच इस प्रकार रखी जाती है कि उसकी भुजाएँ क्षेत्र की दिशा के लंबवत रहें।
कुंडली में धारा प्रवाहित करने पर उसकी दो विपरीत भुजाओं में धारा की दिशाएँ परस्पर विपरीत होती हैं, इसलिए फ्लेमिंग के वामहस्त नियम के अनुसार उन पर विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं।
एक भुजा नीचे की ओर और दूसरी ऊपर की ओर धकेली जाती है, जिससे कुंडली घूमने लगती है।
आधा चक्कर पूरा होते ही दोनों भुजाओं की स्थिति बदल जाती है। यदि धारा की दिशा न बदली जाए तो बल कुंडली को वापस घुमाने लगेंगे और घूर्णन रुक जाएगा।
इसी समस्या को हल करने के लिए विभक्त वलय, यानी दिक्परिवर्तक (Commutator) लगाया जाता है। यह हर आधे चक्कर पर कुंडली में धारा की दिशा उलट देता है।
धारा उलटते ही बलों की दिशा भी उलट जाती है, और कुंडली उसी दिशा में घूमती रहती है—यही विभक्त वलय का महत्त्व है।
विद्युत मोटर का उपयोग विद्युत पंखों, रेफ्रिजरेटरों, विद्युत मिश्रकों, वाशिंग मशीनों तथा कंप्यूटरों में किया जाता है।
दो भुजाओं पर विपरीत बल; विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर धारा उलटता है।
✍️ कैसे करें (How to solve)
पहले कुंडली की दो भुजाओं में धारा की दिशाएँ लिखिए।
हर भुजा पर वामहस्त नियम लगाकर बल की दिशा निकालिए।
फिर बताइए कि विभक्त वलय कैसे घूर्णन जारी रखता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — विभक्त वलय का महत्त्व
विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या महत्त्व है?
कुंडली की दो भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं, जिससे वह घूमने लगती है।
आधा चक्कर पूरा होने पर भुजाओं की स्थिति बदल जाती है; यदि धारा वैसी ही रहे तो बल कुंडली को उलटी दिशा में घुमाने लगेंगे।
विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर कुंडली में धारा की दिशा उलट देता है, जिससे बलों की दिशा भी उलट जाती है।
इसी कारण कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है—यही विभक्त वलय, यानी दिक्परिवर्तक का महत्त्व है।
उदाहरण 2 (Example 2) — मोटर का सिद्धांत
विद्युत मोटर का क्या सिद्धांत है?
जब कोई धारावाही कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में इस प्रकार रखी जाती है कि उसका तल क्षेत्र की दिशा के अनुदिश हो, तो उसकी भुजाओं पर विपरीत दिशाओं में बल लगते हैं।
ये दो विपरीत बल मिलकर एक बल-युग्म बनाते हैं, जो कुंडली को घुमा देता है।
यही विद्युत मोटर का सिद्धांत है—धारावाही कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में बल-आघूर्ण का अनुभव करके घूमने लगती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
विद्युत मोटर यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है। ❌
यह काम विद्युत जनित्र का है; मोटर इसका उलटा करती है।
मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल
पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।