← अध्ययन

समुद्रों से ऊर्जा तथा भूतापीय ऊर्जा

आज क्या सीखेंगे

तीनों समुद्री ऊर्जाओं और भूतापीय ऊर्जा की कार्यविधि तथा सीमाएँ बताना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
समुद्र दिन में दो बार चढ़ता और उतरता है, लहरें लगातार किनारे से टकराती हैं, और उसकी सतह तथा गहराई के ताप में अंतर बना रहता है।
इन तीनों में ऊर्जा है—पर तीनों को पकड़ना आसान नहीं।
🧠 समझिए (Understand)
ज्वारीय ऊर्जा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण समुद्र के जल-स्तर के चढ़ने और उतरने से प्राप्त होती है। किसी सँकरी खाड़ी के मुहाने पर बाँध बनाकर उसमें टरबाइन लगाया जाता है, जो ज्वार-भाटा में बहते जल से घूमकर विद्युत उत्पन्न करता है।
इसकी सीमा यह है कि ऐसी उपयुक्त जगहें बहुत कम हैं और ज्वार-भाटे से मिलने वाली ऊर्जा का परिमाण भी सीमित होता है।
तरंग ऊर्जा समुद्र तट के निकट उठने वाली प्रबल तरंगों की गतिज ऊर्जा से मिलती है, जिसे विभिन्न युक्तियों से टरबाइन घुमाने में लगाया जाता है।
तरंग ऊर्जा का व्यावहारिक उपयोग केवल वहीं हो सकता है जहाँ तरंगें अत्यंत प्रबल हों, और उन्हें पकड़ने वाली युक्तियाँ बनाना अभी महँगा है।
महासागरीय तापीय ऊर्जा समुद्र की सतह तथा गहराई के जल के ताप-अंतर से प्राप्त होती है। इसका संयंत्र तभी चल सकता है जब सतह के जल तथा 2 किलोमीटर तक की गहराई के जल के ताप में कम से कम 20 °C का अंतर हो।
इस संयंत्र में सतह का गर्म जल अमोनिया जैसे वाष्पशील द्रव को उबालकर उसकी वाष्प बनाता है, जो टरबाइन घुमाती है; गहराई का ठंडा जल उस वाष्प को फिर द्रव में बदल देता है।
भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के भीतर की ऊष्मा से मिलती है। भूगर्भीय परिवर्तनों से पिघला हुआ तप्त मैग्मा ऊपर आकर कुछ स्थानों पर एकत्र हो जाता है, जिन्हें तप्त स्थल कहते हैं।
भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आकर भाप बन जाता है और दाब के कारण ऊपर की ओर धकेला जाता है; इसी भाप को पाइपों द्वारा निकालकर टरबाइन घुमाया जाता है। न्यूज़ीलैंड तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे संयंत्र काम कर रहे हैं।
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. पहले पहचानिए ऊर्जा किस रूप में है—गतिज, ताप-अंतर या ऊष्मा।
  2. फिर बताइए टरबाइन कैसे घूमता है।
  3. अंत में सीमा लिखिए—प्रायः उपयुक्त स्थानों की कमी।
उदाहरण 1 (Example 1) — महासागरों से मिलने वाली ऊर्जाओं की सीमाएँ
महासागरों से प्राप्त हो सकने वाली ऊर्जाओं की क्या सीमाएँ हैं?
ज्वारीय ऊर्जा के लिए सँकरी खाड़ी पर बाँध बनाना पड़ता है और ऐसी उपयुक्त जगहें बहुत कम हैं।
तरंग ऊर्जा का उपयोग केवल वहीं संभव है जहाँ तरंगें अत्यंत प्रबल हों, और उन्हें पकड़ने वाली युक्तियाँ महँगी हैं।
महासागरीय तापीय ऊर्जा संयंत्र तभी चलता है जब सतह और 2 किलोमीटर गहराई के जल के ताप में कम से कम 20 °C का अंतर हो।
तीनों में ऊर्जा तो बहुत है, पर उसे दक्षतापूर्वक और सस्ते में निष्कर्षित करने की प्रौद्योगिकी अभी सीमित है—यही इनकी मुख्य सीमा है।
उदाहरण 2 (Example 2) — भूतापीय ऊर्जा क्या है
भूतापीय ऊर्जा क्या होती है?
भूगर्भीय परिवर्तनों के कारण पृथ्वी के भीतर का पिघला हुआ तप्त मैग्मा ऊपर आकर कुछ स्थानों पर एकत्र हो जाता है, जिन्हें तप्त स्थल कहते हैं।
भूमिगत जल इन तप्त स्थलों के संपर्क में आकर भाप बन जाता है और दाब के कारण ऊपर की ओर धकेला जाता है।
इस भाप को पाइपों द्वारा बाहर निकालकर टरबाइन घुमाया जाता है, जिससे विद्युत उत्पन्न होती है।
पृथ्वी के भीतर की इसी ऊष्मा से प्राप्त ऊर्जा को भूतापीय ऊर्जा कहते हैं; न्यूज़ीलैंड तथा अमेरिका में ऐसे संयंत्र काम कर रहे हैं।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
ज्वारीय ऊर्जा सूर्य के कारण मिलती है। ❌
ज्वार-भाटा मुख्यतः चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से आता है, सूर्य से नहीं।
ज्वारीय ऊर्जा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का परिणाम है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

ज्वारीय ऊर्जा मुख्यतः किसके कारण मिलती है?

सवाल 2

महासागरीय तापीय ऊर्जा संयंत्र के लिए कितने ताप-अंतर की आवश्यकता होती है?

सवाल 3

भूतापीय ऊर्जा किससे प्राप्त होती है?
अगला विषय (Next topic): नाभिकीय ऊर्जा →← पिछला विषय (Previous topic): सौर ऊर्जा—सौर कुकर और सौर सेल