← अध्ययन

सौर ऊर्जा—सौर कुकर और सौर सेल

आज क्या सीखेंगे

सौर कुकर की रचना और सौर सेल के लाभ-सीमाएँ बताना।

📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)
सूर्य से पृथ्वी तक आने वाली ऊर्जा का बहुत छोटा-सा भाग ही हम तक पहुँचता है, फिर भी वह हमारी सारी जरूरतों से कहीं अधिक है।
समस्या ऊर्जा की कमी नहीं, उसे पकड़ने और सँभालने की है।
🧠 समझिए (Understand)
सूर्य अनादि काल से ऊर्जा विकिरित करता आ रहा है और वह अगले लगभग पाँच अरब वर्षों तक ऐसा ही करता रहेगा, इसलिए सौर ऊर्जा व्यावहारिक रूप से अक्षय है।
वायुमंडल के बाहर प्रति सेकंड प्रति वर्ग मीटर लगभग 1.4 किलोजूल सौर ऊर्जा पहुँचती है, जिसे सौर स्थिरांक कहते हैं; इसका लगभग आधा भाग ही पृथ्वी के पृष्ठ तक पहुँच पाता है।
सौर ऊष्मक युक्तियों में काले पृष्ठ का उपयोग होता है, क्योंकि काली सतह अन्य रंगों की तुलना में अधिक ऊष्मा अवशोषित करती है।
सौर कुकर में तीन चीजें मिलकर काम करती हैं—अवतल दर्पण सूर्य की किरणों को केंद्रित करता है, भीतर का काला पृष्ठ ऊष्मा अवशोषित करता है, और ऊपर लगी काँच की पट्टिका ऊष्मा को बाहर नहीं जाने देती।
सौर कुकर के लाभ हैं—ईंधन का कोई खर्च नहीं, कोई प्रदूषण नहीं, और भोजन के पोषक तत्व नष्ट नहीं होते।
इसकी हानियाँ हैं—यह बादलों वाले दिन तथा रात में काम नहीं करता, इसमें समय अधिक लगता है, और इससे तलना या रोटी सेंकना संभव नहीं क्योंकि उसके लिए आवश्यक उच्च ताप नहीं मिलता।
सौर सेल सिलिकॉन जैसे अर्धचालक से बनाया जाता है और वह सौर ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है; अनेक सौर सेलों को जोड़कर सौर पैनल बनाया जाता है।
सौर सेल का कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता, रख-रखाव लगभग नहीं के बराबर है और वह दूरस्थ तथा दुर्गम स्थानों में भी काम करता है—इसीलिए कृत्रिम उपग्रहों तथा अंतरिक्ष यानों में इसका उपयोग होता है।
पर सिलिकॉन का शुद्धिकरण महँगा है और सेलों को जोड़ने में चाँदी का उपयोग होता है, इसलिए सौर सेल अभी भी महँगे हैं।
सौर कुकर: तीन भाग, तीन कामसूर्यपरावर्तक दर्पणकाला पात्रकाँच की पट्टिकादर्पण प्रकाश केंद्रित करता है; काला पृष्ठ ऊष्मा लेता है; काँच ऊष्मा बाहर जाने से रोकता है।
दर्पण प्रकाश केंद्रित करता है, काला पृष्ठ ऊष्मा अवशोषित करता है और काँच ऊष्मा को भीतर रोकता है।
सूत्र (Formula)
सौर स्थिरांक ≈ 1.4 kJ/s प्रति m²
✍️ कैसे करें (How to solve)
  1. सौर कुकर का प्रश्न हो तो तीनों अंग और उनका काम लिखिए।
  2. लाभ-हानि पूछी हो तो दोनों अलग-अलग गिनाइए।
  3. सौर सेल का प्रश्न हो तो सीधे विद्युत में रूपांतरण पर जोर दीजिए।
उदाहरण 1 (Example 1) — सौर कुकर में कौन-सा दर्पण
सौर कुकर के लिए कौन-सा दर्पण—अवतल, उत्तल अथवा समतल—सर्वाधिक उपयुक्त होता है? क्यों?
सौर कुकर में सूर्य की किरणों को एक छोटे क्षेत्र पर केंद्रित करके उच्च ताप उत्पन्न करना होता है।
उत्तल दर्पण किरणों को फैला देता है और समतल दर्पण केवल परावर्तित करता है, केंद्रित नहीं करता।
अवतल दर्पण समांतर किरणों को अपने फोकस पर मिला देता है, जिससे वहाँ ताप बहुत बढ़ जाता है।
इसीलिए सौर कुकर के लिए अवतल दर्पण सर्वाधिक उपयुक्त होता है।
उदाहरण 2 (Example 2) — सौर कुकर के लाभ और हानियाँ
सौर कुकर का उपयोग करने के क्या लाभ तथा हानियाँ हैं? क्या ऐसे भी क्षेत्र हैं जहाँ सौर कुकरों की सीमित उपयोगिता है?
लाभ—ईंधन का कोई खर्च नहीं, कोई प्रदूषण नहीं, भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और एक बार लगाने के बाद खर्च लगभग शून्य है।
हानियाँ—यह बादलों वाले दिन तथा रात में काम नहीं करता, खाना पकने में अधिक समय लगता है, और तलने या रोटी सेंकने योग्य उच्च ताप नहीं मिलता।
इसे बार-बार सूर्य की दिशा में घुमाना भी पड़ता है।
हाँ, ध्रुवीय क्षेत्रों तथा ऐसे स्थानों में जहाँ वर्ष के अधिकांश दिन बादल छाए रहते हैं अथवा वर्षा होती है, सौर कुकरों की उपयोगिता बहुत सीमित रह जाती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)
सौर कुकर में उत्तल दर्पण लगाया जाता है। ❌
उत्तल दर्पण किरणें फैला देता है; केंद्रित करने के लिए अवतल दर्पण चाहिए।
सौर कुकर में अवतल दर्पण लगता है।

खुद जाँचें — 3 छोटे सवाल

पहले विकल्प चुनें। फिर उत्तर और उसका कारण देखें। यह समझ की जाँच है।

सवाल 1

सौर कुकर में कौन-सा दर्पण प्रयुक्त होता है?

सवाल 2

गर्म जल प्राप्त करने के लिए सौर जल तापक का उपयोग किस दिन नहीं कर सकते?

सवाल 3

सौर सेल किस पदार्थ से बनाया जाता है?
अगला विषय (Next topic): समुद्रों से ऊर्जा तथा भूतापीय ऊर्जा →← पिछला विषय (Previous topic): प्रश्नावली 14.2