सही उत्तर: (A) रामायणे इस सूक्ति का अर्थ है—केवल भवन को घर नहीं कहते, गृहिणी ही घर है। यहाँ गृहिणी का महत्त्व दिखाया गया है।
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प्रश्न 103
जयदेवः कस्य ग्रन्थस्य प्रणेता मन्यते?
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सही उत्तर: (A) चन्द्रालोकस्य जयदेव ‘चन्द्रालोक’ नामक अलंकारशास्त्र के ग्रंथ के प्रणेता माने जाते हैं। ‘दशरूपक’ धनंजय की और ‘काव्यानुशासन’ हेमचन्द्र की रचना है।
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प्रश्न 104
“एकं सद् बहुधा भवति”—इति मान्यता कुत्र प्राप्यते?
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सही उत्तर: (B) वेदेषु ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ का भाव वेदों में ही मिलता है—सत्ता एक है, विद्वान् उसे अनेक नामों से कहते हैं।
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प्रश्न 105
भामहकृतकाव्यालङ्कारस्य अध्यायाभिधानमस्ति
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सही उत्तर: (A) परिच्छेदः भामह के ‘काव्यालंकार’ के अध्यायों को ‘परिच्छेद’ कहा गया है।
सही उत्तर: (C) बृहदारण्यकोपनिषद् गद्यांश में छान्दोग्य और बृहदारण्यक—दोनों को दीर्घाकार कहा गया है, और विकल्पों में बृहदारण्यक ही सबसे बड़ी उपनिषद् के रूप में प्रसिद्ध है।
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प्रश्न 107
श्वेतकेतु-आरुणेयः कस्य पुत्रः अस्ति?
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सही उत्तर: (B) उद्दालकस्य गद्यांश के अनुसार श्वेतकेतु आरुणेय उद्दालक आरुणि के पुत्र थे, जिन्हें पिता से ब्रह्मविद्या मिली।
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प्रश्न 108
कः महर्षिः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्यां प्राप्तवान्?
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सही उत्तर: (C) अङ्गिरसः गद्यांश कहता है कि छान्दोग्य के तीसरे भाग में घोर आङ्गिरस नामक महर्षि ने श्रीकृष्ण से ब्रह्मविद्या पाई।
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प्रश्न 109
मनसः आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं किमस्ति?
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सही उत्तर: (B) ब्रह्मतन्त्रम् गद्यांश में उपनिषदों की ब्रह्मविद्या को मन और आत्मा के लिए अतीव शान्तिप्रद ब्रह्मतन्त्र कहा गया है।
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प्रश्न 110
अस्य गद्यांशस्य उचितः शीर्षकः कः?
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सही उत्तर: (A) आध्यात्मिकी भावना पूरा गद्यांश संस्कृत वाङ्मय में व्याप्त आध्यात्मिक भावना पर है, इसलिए यही उपयुक्त शीर्षक है।
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प्रश्न 111
गद्यांश 111–115: स्त्रीणां कृते शिक्षायाः महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति। यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरः अशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैव अविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति। यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति। अत एव महानिर्वाणतन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याप्येवं लालनिया शिक्षणिया प्रयत्नतः।” विवाहे सञ्जाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति। यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्याभावात् स्त्री स्वकीयकर्तव्यं न जानाति, अत एव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति। अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावत् आवश्यकी वर्तते। स्त्रियः मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्च उन्नतिं प्राप्नोति। उक्तं च मनुना—“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः॥” “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”—केनोक्तमस्ति?
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सही उत्तर: (A) मनुना गद्यांश के अंत में ही कहा गया है—‘उक्तं च मनुना’, यानी यह सूक्ति मनु की है।
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प्रश्न 112
समाजस्य उन्नतये किमावश्यकमस्ति?
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सही उत्तर: (B) स्त्रीणामादरम् गद्यांश कहता है कि जिस देश और समाज में स्त्रियों का आदर होता है, वही उन्नति प्राप्त करता है।
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प्रश्न 113
दाम्पत्यजीवनस्य कृते किमावश्यकम्?
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सही उत्तर: (C) विद्या गद्यांश के अनुसार यदि पुरुष विद्वान् हो और स्त्री विद्या-शून्य, तो दाम्पत्य-जीवन सुखकर नहीं होता—इसलिए विद्या आवश्यक है।
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प्रश्न 114
मातृशक्तेः प्रतीकभूताः काः?
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सही उत्तर: (C) स्त्रियः गद्यांश में स्त्रियों को मातृशक्ति का प्रतीक कहा गया है, इसीलिए उनका सदा सम्मान करना चाहिए।
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प्रश्न 115
गद्यांशस्य उपयुक्तः शीर्षकः कोऽस्ति?
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सही उत्तर: (A) स्त्रीशिक्षायाः आवश्यकता पूरा गद्यांश स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता पर है, इसलिए यही उपयुक्त शीर्षक है।
सही उत्तर: (C) गोपा ङि अधि ‘अधिगोपम्’ अव्ययीभाव समास है, जिसमें अधिकरण का भाव है—गोप के विषय में। अलौकिक विग्रह में अधिकरण की सप्तमी ‘ङि’ के साथ ‘अधि’ आता है।
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प्रश्न 128
‘आशिषि नाथः’ इति सूत्रेण का विभक्तिः प्रयुज्यते?
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सही उत्तर: (C) षष्ठी ‘आशिषि नाथः’ सूत्र षष्ठी विभक्ति का विधान करता है—आशीर्वाद के अर्थ में ‘नाथ्’ धातु का कर्म षष्ठी में आता है, जैसे ‘सर्पिषो नाथते’।
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प्रश्न 129
‘गो’ शब्दस्य द्वितीया विभक्तिः बहुवचनस्य रूपमस्ति
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सही उत्तर: (A) गाः ‘गो’ शब्द की द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में रूप ‘गाः’ बनता है।
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प्रश्न 130
कर्मवाच्ये कर्मणः प्रयोगः कस्यां विभक्तौ भवति?
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सही उत्तर: (C) प्रथमायाम् कर्मवाच्य में कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है और कर्ता तृतीया में चला जाता है।
सही उत्तर: (B) अभवत ‘भू’ धातु लङ् लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन में ‘अभवत’ बनता है। ‘अभवत्’ प्रथमपुरुष एकवचन का रूप है।
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प्रश्न 132
‘रूपवद्भार्यः’ इत्यस्मिन् पदे कः समासः अस्ति?
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सही उत्तर: (A) बहुव्रीहिः ‘रूपवद्भार्यः’ का अर्थ है वह जिसकी भार्या रूपवती हो—समस्त पद किसी तीसरे का बोध करा रहा है, इसलिए बहुव्रीहि समास है।
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प्रश्न 133
गुणसंज्ञाविधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (A) अदेङ् गुणः गुण संज्ञा का विधान ‘अदेङ् गुणः’ सूत्र से होता है—अ, ए और ओ को गुण कहा जाता है।
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प्रश्न 134
‘राजन्’ शब्दस्य द्वितीयाविभक्तेः बहुवचनरूपमस्ति
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सही उत्तर: (E) उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति ‘राजन्’ शब्द की द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में रूप ‘राज्ञः’ बनता है, जो दिए गए किसी विकल्प में नहीं है।
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प्रश्न 135
अवर्णः कतिभेदात्मकमस्ति?
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सही उत्तर: (C) अष्टादश ‘अ’ वर्ण के अठारह भेद माने जाते हैं—ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत, प्रत्येक के उदात्त, अनुदात्त और स्वरित, और प्रत्येक के अनुनासिक तथा निरनुनासिक।
सही उत्तर: (A) अन्तःस्थवर्णानाम् अन्तःस्थ वर्णों—य, र, ल, व—का आभ्यन्तर प्रयत्न ‘ईषत्स्पृष्ट’ है, यानी जीभ स्थान को थोड़ा ही छूती है।
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प्रश्न 144
संयोगसंज्ञाविधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (B) हलोनन्तराः संयोगः ‘हलोऽनन्तराः संयोगः’ सूत्र संयोग संज्ञा का विधान करता है—बीच में स्वर न आए ऐसे व्यंजनों का मेल संयोग कहलाता है।
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प्रश्न 145
‘पराजेरसोढः’ इति सूत्रेण किं भवति?
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सही उत्तर: (A) अपादानसंज्ञा ‘पराजेरसोढः’ सूत्र से अपादान संज्ञा होती है—जिसे सहा न जा सके, वह अपादान बनकर पञ्चमी में आता है।
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प्रश्न 146
‘वारिणी’ शब्दस्य का विभक्तिरस्ति?
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सही उत्तर: (D) उपर्युक्तेषु एकस्माद् अधिकम् ‘वारि’ नपुंसकलिङ्ग है, और उसका द्विवचन रूप ‘वारिणी’ प्रथमा तथा द्वितीया—दोनों विभक्तियों में एक-सा रहता है, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है।
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प्रश्न 147
पाणिनीयमाहेश्वरसूत्रेषु स्वरबोधकानां सूत्राणां संख्या का अस्ति?
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सही उत्तर: (B) चत्वारः माहेश्वर सूत्रों में स्वरबोधक चार सूत्र हैं—अइउण्, ऋऌक्, एओङ् और ऐऔच्।
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प्रश्न 148
‘ते’ अस्ति
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सही उत्तर: (D) उपर्युक्तेषु एकस्माद् अधिकम् ‘ते’ रूप ‘तत्’ शब्द के नपुंसकलिङ्ग प्रथमा द्विवचन में भी आता है और स्त्रीलिङ्ग प्रथमा द्विवचन में भी, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है। पुल्लिङ्ग प्रथमा द्विवचन का रूप ‘तौ’ होता है।
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प्रश्न 149
‘साधवे’ शब्दरूपे साधुशब्दस्य के विभक्तिवचने प्रयुक्ते स्तः?
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सही उत्तर: (C) चतुर्थी एकवचनम् ‘साधवे’ में ‘साधु’ शब्द की चतुर्थी विभक्ति, एकवचन है—साधु के लिए।
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प्रश्न 150
‘गवां गोषु वा कृष्णा बहुक्षीरा’ इति वाक्यं कस्य सूत्रस्य उदाहरणमस्ति?
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सही उत्तर: (C) यतश्च निर्धारणम् ‘गवां गोषु वा कृष्णा बहुक्षीरा’ में अनेक गायों में से एक को छाँटा जा रहा है, यानी निर्धारण हो रहा है—इसलिए यह ‘यतश्च निर्धारणम्’ का उदाहरण है, जिससे षष्ठी या सप्तमी आती है।