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TRE3 — भाषा सामान्य अध्ययन और Sanskrit

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GS: हिन्दी / English · भाषा के प्रश्न मूल भाषा में रहेंगे।

प्रश्न-पत्र निर्देश

150 प्रश्न · 150 अंक · 2 घंटे 30 मिनट

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प्रश्न 101
धर्मनीतिकथानां वर्णनं महाभारतस्य कस्मिन् पर्वणि विद्यते?
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सही उत्तर: (B) शान्तिपर्वणि
महाभारत के शान्तिपर्व में धर्म, नीति और राजधर्म की विस्तृत कथाएँ तथा उपदेश मिलते हैं।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 102
“न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते” कस्मिन् ग्रन्थे उल्लिखितमस्ति?
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सही उत्तर: (A) रामायणे
इस सूक्ति का अर्थ है—केवल भवन को घर नहीं कहते, गृहिणी ही घर है। यहाँ गृहिणी का महत्त्व दिखाया गया है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 103
जयदेवः कस्य ग्रन्थस्य प्रणेता मन्यते?
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सही उत्तर: (A) चन्द्रालोकस्य
जयदेव ‘चन्द्रालोक’ नामक अलंकारशास्त्र के ग्रंथ के प्रणेता माने जाते हैं। ‘दशरूपक’ धनंजय की और ‘काव्यानुशासन’ हेमचन्द्र की रचना है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 104
“एकं सद् बहुधा भवति”—इति मान्यता कुत्र प्राप्यते?
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सही उत्तर: (B) वेदेषु
‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ का भाव वेदों में ही मिलता है—सत्ता एक है, विद्वान् उसे अनेक नामों से कहते हैं।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 105
भामहकृतकाव्यालङ्कारस्य अध्यायाभिधानमस्ति
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सही उत्तर: (A) परिच्छेदः
भामह के ‘काव्यालंकार’ के अध्यायों को ‘परिच्छेद’ कहा गया है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 106
गद्यांश 106–110: निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत्साहित्यं व्याप्तम् आध्यात्मिकया भावनया। अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः। छान्दोग्योपनिषद्-बृहदारण्यकोपनिषदौ च उपनिषद्-द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च। तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोराङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकआरुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु-आरुणेयेन ब्रह्मविद्याप्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषदाम् अध्यात्मविद्यापरमतिवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम्। बृहदाकारम् उपनिषद् अस्ति
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सही उत्तर: (C) बृहदारण्यकोपनिषद्
गद्यांश में छान्दोग्य और बृहदारण्यक—दोनों को दीर्घाकार कहा गया है, और विकल्पों में बृहदारण्यक ही सबसे बड़ी उपनिषद् के रूप में प्रसिद्ध है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 107
श्वेतकेतु-आरुणेयः कस्य पुत्रः अस्ति?
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सही उत्तर: (B) उद्दालकस्य
गद्यांश के अनुसार श्वेतकेतु आरुणेय उद्दालक आरुणि के पुत्र थे, जिन्हें पिता से ब्रह्मविद्या मिली।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 108
कः महर्षिः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्यां प्राप्तवान्?
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सही उत्तर: (C) अङ्गिरसः
गद्यांश कहता है कि छान्दोग्य के तीसरे भाग में घोर आङ्गिरस नामक महर्षि ने श्रीकृष्ण से ब्रह्मविद्या पाई।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 109
मनसः आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं किमस्ति?
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सही उत्तर: (B) ब्रह्मतन्त्रम्
गद्यांश में उपनिषदों की ब्रह्मविद्या को मन और आत्मा के लिए अतीव शान्तिप्रद ब्रह्मतन्त्र कहा गया है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 110
अस्य गद्यांशस्य उचितः शीर्षकः कः?
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सही उत्तर: (A) आध्यात्मिकी भावना
पूरा गद्यांश संस्कृत वाङ्मय में व्याप्त आध्यात्मिक भावना पर है, इसलिए यही उपयुक्त शीर्षक है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 111
गद्यांश 111–115: स्त्रीणां कृते शिक्षायाः महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति। यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरः अशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैव अविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति। यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति। अत एव महानिर्वाणतन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याप्येवं लालनिया शिक्षणिया प्रयत्नतः।” विवाहे सञ्जाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति। यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्याभावात् स्त्री स्वकीयकर्तव्यं न जानाति, अत एव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति। अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावत् आवश्यकी वर्तते। स्त्रियः मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्च उन्नतिं प्राप्नोति। उक्तं च मनुना—“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः॥” “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”—केनोक्तमस्ति?
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सही उत्तर: (A) मनुना
गद्यांश के अंत में ही कहा गया है—‘उक्तं च मनुना’, यानी यह सूक्ति मनु की है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 112
समाजस्य उन्नतये किमावश्यकमस्ति?
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सही उत्तर: (B) स्त्रीणामादरम्
गद्यांश कहता है कि जिस देश और समाज में स्त्रियों का आदर होता है, वही उन्नति प्राप्त करता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 113
दाम्पत्यजीवनस्य कृते किमावश्यकम्?
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सही उत्तर: (C) विद्या
गद्यांश के अनुसार यदि पुरुष विद्वान् हो और स्त्री विद्या-शून्य, तो दाम्पत्य-जीवन सुखकर नहीं होता—इसलिए विद्या आवश्यक है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 114
मातृशक्तेः प्रतीकभूताः काः?
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सही उत्तर: (C) स्त्रियः
गद्यांश में स्त्रियों को मातृशक्ति का प्रतीक कहा गया है, इसीलिए उनका सदा सम्मान करना चाहिए।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 115
गद्यांशस्य उपयुक्तः शीर्षकः कोऽस्ति?
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सही उत्तर: (A) स्त्रीशिक्षायाः आवश्यकता
पूरा गद्यांश स्त्री-शिक्षा की आवश्यकता पर है, इसलिए यही उपयुक्त शीर्षक है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 116
गद्यांश 116–120: यत् सर्वलोकहितं सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावं वहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वतरूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम्। यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरित्यम् परिवर्तनक्षमतां वा तत् सत्यमिति। तथाविधविवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते। अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिकसत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम्। सत्यमेव धर्मः। नहि धर्मः सत्याद् अतिरिक्तो। सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम्। अत एव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिः उदरीयते। सत्यं किमस्ति?
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सही उत्तर: (C) धर्मस्य मूलम्
गद्यांश स्पष्ट कहता है—‘धर्मस्य मूलं सत्यम्’, यानी सत्य ही धर्म की जड़ है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 117
जगति सर्वविधायकं किमस्ति?
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सही उत्तर: (B) सत्यम्
गद्यांश के अनुसार जो सर्वलोक का हित साधता है, जगत् को सुख देता है और समाज की रक्षा करता है—वह सत्य ही है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 118
‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’—केषाम् उक्तिः वर्तते?
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सही उत्तर: (A) वेदान्तविदाम्
‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ वेदान्तियों की प्रसिद्ध उक्ति है, जिसका अर्थ है—ब्रह्म ही सत्य है, जगत् मिथ्या।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 119
समाजस्य संरक्षणं यद् विदधाति तत् अस्ति
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सही उत्तर: (A) सत्यम्
गद्यांश की पहली पंक्ति ही कहती है कि समाज का संरक्षण करने वाला तत्त्व सत्य है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 120
सत्यं जनं कस्मात् रक्षति?
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सही उत्तर: (B) पापात्
गद्यांश के भाव के अनुसार सत्य मनुष्य को पाप से बचाता है, क्योंकि सत्य ही धर्म है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 121
गद्यांश 121–125: स्वराज्यं हि नाम राष्ट्रस्य परमोৎकर्षधायकं तत्त्वम्। सर्वेषां स्वराष्ट्रीयप्रजाजनानां सम्मत्या प्रतिनिधिव्यवस्था प्रवर्तितं यद्राज्यं तत्स्वराज्यपदेन व्यपदिश्यते। तादृशस्वराज्योपलब्ध्यर्थमेव जनैः प्रयतितव्यम् इति ऋग्वेदेऽपि समुपदिष्टम्। वेदे स्वराज्यमहिमा वर्णनार्थमेकमखिलं सूक्तमेव पठ्यते तद्धि स्वराज्यसूक्तमिति नाम्ना कथ्यते। अन्यत्रापि बहुत्र स्वराज्यगुणगरिमा अवलोक्यते। कस्यापि राष्ट्रस्य कृते स्वराज्यसदृशमन्यद् भूतं प्रभूतं वैभवं नास्ति। एतेन ध्वन्यते स्पष्टं यत् प्रजातन्त्रशासनमपि तदेवोत्कृष्टं यत् स्वराज्यसंवलितं भवेत्। उच्यते च मनुना—उत्कृष्टं प्रजातन्त्रशासनमस्ति
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सही उत्तर: (B) स्वराज्यसंवलितम्
गद्यांश कहता है कि प्रजातन्त्र शासन भी तभी उत्कृष्ट है जब वह स्वराज्य से संवलित यानी युक्त हो।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 122
‘अर्थशास्त्रम्’ कस्याः नीतेः तन्त्ररूपेण ज्ञायते?
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सही उत्तर: (C) राजनीतेः तन्त्रम्
कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ राजनीति का तन्त्र यानी शास्त्र माना जाता है—उसमें राज्य-संचालन के नियम हैं।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 123
कौटिल्येन कस्य वंशस्य शासनम् उच्छेदितम्?
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सही उत्तर: (B) नन्दवंशस्य शासनम्
कौटिल्य ने नन्दवंश के शासन का उच्छेद कराया और चन्द्रगुप्त मौर्य को सिंहासन पर बैठाया।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 124
स्वराष्ट्रीयजनैः प्रवर्तितं राज्यं किं कथ्यते?
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सही उत्तर: (A) स्वराज्यम्
गद्यांश के अनुसार अपने राष्ट्र की प्रजा की सम्मति से प्रतिनिधि-व्यवस्था द्वारा चलाया गया राज्य ‘स्वराज्य’ कहलाता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 125
स्वराज्यमस्ति
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सही उत्तर: (B) राष्ट्रस्य परमोৎकर्षधायकं तत्त्वम्
गद्यांश की पहली पंक्ति ही कहती है—‘स्वराज्यं हि नाम राष्ट्रस्य परमोत्कर्षधायकं तत्त्वम्’।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 126
‘आवाम्’ कस्य शब्दस्य संस्कृतरूपमस्ति?
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सही उत्तर: (C) अस्मद्
‘आवाम्’ ‘अस्मद्’ शब्द का द्विवचन रूप है—हम दोनों।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 127
‘अधिगोपम्’ इति सामासिकपदस्य अलौकिकः विग्रहः वर्तते
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सही उत्तर: (C) गोपा ङि अधि
‘अधिगोपम्’ अव्ययीभाव समास है, जिसमें अधिकरण का भाव है—गोप के विषय में। अलौकिक विग्रह में अधिकरण की सप्तमी ‘ङि’ के साथ ‘अधि’ आता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 128
‘आशिषि नाथः’ इति सूत्रेण का विभक्तिः प्रयुज्यते?
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सही उत्तर: (C) षष्ठी
‘आशिषि नाथः’ सूत्र षष्ठी विभक्ति का विधान करता है—आशीर्वाद के अर्थ में ‘नाथ्’ धातु का कर्म षष्ठी में आता है, जैसे ‘सर्पिषो नाथते’।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 129
‘गो’ शब्दस्य द्वितीया विभक्तिः बहुवचनस्य रूपमस्ति
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सही उत्तर: (A) गाः
‘गो’ शब्द की द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में रूप ‘गाः’ बनता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 130
कर्मवाच्ये कर्मणः प्रयोगः कस्यां विभक्तौ भवति?
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सही उत्तर: (C) प्रथमायाम्
कर्मवाच्य में कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है और कर्ता तृतीया में चला जाता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 131
‘भू’ धातोः लङ् लकारस्य मध्यमपुरुषस्य बहुवचनरूपमस्ति
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सही उत्तर: (B) अभवत
‘भू’ धातु लङ् लकार, मध्यमपुरुष, बहुवचन में ‘अभवत’ बनता है। ‘अभवत्’ प्रथमपुरुष एकवचन का रूप है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 132
‘रूपवद्भार्यः’ इत्यस्मिन् पदे कः समासः अस्ति?
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सही उत्तर: (A) बहुव्रीहिः
‘रूपवद्भार्यः’ का अर्थ है वह जिसकी भार्या रूपवती हो—समस्त पद किसी तीसरे का बोध करा रहा है, इसलिए बहुव्रीहि समास है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 133
गुणसंज्ञाविधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (A) अदेङ् गुणः
गुण संज्ञा का विधान ‘अदेङ् गुणः’ सूत्र से होता है—अ, ए और ओ को गुण कहा जाता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 134
‘राजन्’ शब्दस्य द्वितीयाविभक्तेः बहुवचनरूपमस्ति
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सही उत्तर: (E) उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
‘राजन्’ शब्द की द्वितीया विभक्ति, बहुवचन में रूप ‘राज्ञः’ बनता है, जो दिए गए किसी विकल्प में नहीं है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 135
अवर्णः कतिभेदात्मकमस्ति?
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सही उत्तर: (C) अष्टादश
‘अ’ वर्ण के अठारह भेद माने जाते हैं—ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत, प्रत्येक के उदात्त, अनुदात्त और स्वरित, और प्रत्येक के अनुनासिक तथा निरनुनासिक।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 136
‘दा’ धातोः लट् लकारस्य प्रथमपुरुषस्य बहुवचनस्य रूपमस्ति
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सही उत्तर: (A) ददति
‘दा’ धातु लट् लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन में ‘ददति’ बनता है—‘ददाति’ एकवचन का रूप है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 137
‘यण्’ प्रत्याहारे कः वर्णः न परिगण्यते?
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सही उत्तर: (C) ह
‘यण्’ प्रत्याहार में य्, व्, र् और ल्—ये चार वर्ण आते हैं। ‘ह’ उसमें नहीं है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 138
‘कृष्णश्रितः’ इति सामासिकपदस्य लौकिकः विग्रहः अस्ति
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सही उत्तर: (C) कृष्णं श्रितः
‘कृष्णश्रितः’ का लौकिक विग्रह ‘कृष्णं श्रितः’ है—कृष्ण की शरण में गया हुआ। यह द्वितीया तत्पुरुष है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 139
‘कारके’ कीदृशं सूत्रं वर्तते?
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सही उत्तर: (B) अधिकारसूत्रम्
‘कारके’ अधिकार सूत्र है—यह आगे आने वाले सूत्रों पर अपना अधिकार चलाता है, स्वयं कोई विधि नहीं करता।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 140
‘हा’ योगे का विभक्तिः प्रयुज्यते?
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सही उत्तर: (A) द्वितीया
खेद प्रकट करने वाले ‘हा’ के योग में कर्म द्वितीया विभक्ति में आता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 141
‘लभ्’ धातोः लट् लकारस्य उत्तमपुरुषस्य एकवचनरूपमस्ति
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सही उत्तर: (A) लभे
‘लभ्’ आत्मनेपदी धातु है, इसलिए लट् लकार, उत्तमपुरुष, एकवचन में रूप ‘लभे’ बनता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 142
वृद्धिसन्धि विधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (A) वृद्धिरेचि
वृद्धि संज्ञा और वृद्धि संधि का आधार सूत्र ‘वृद्धिरेचि’ है, जिससे ‘अ/आ’ के बाद ‘ए/ऐ/ओ/औ’ आने पर वृद्धि होती है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 143
‘ईषत्स्पृष्टम्’ केषां वर्णानाम् आभ्यन्तरप्रयत्नम् अस्ति?
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सही उत्तर: (A) अन्तःस्थवर्णानाम्
अन्तःस्थ वर्णों—य, र, ल, व—का आभ्यन्तर प्रयत्न ‘ईषत्स्पृष्ट’ है, यानी जीभ स्थान को थोड़ा ही छूती है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 144
संयोगसंज्ञाविधायकं सूत्रमस्ति
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सही उत्तर: (B) हलोनन्तराः संयोगः
‘हलोऽनन्तराः संयोगः’ सूत्र संयोग संज्ञा का विधान करता है—बीच में स्वर न आए ऐसे व्यंजनों का मेल संयोग कहलाता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 145
‘पराजेरसोढः’ इति सूत्रेण किं भवति?
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सही उत्तर: (A) अपादानसंज्ञा
‘पराजेरसोढः’ सूत्र से अपादान संज्ञा होती है—जिसे सहा न जा सके, वह अपादान बनकर पञ्चमी में आता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 146
‘वारिणी’ शब्दस्य का विभक्तिरस्ति?
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सही उत्तर: (D) उपर्युक्तेषु एकस्माद् अधिकम्
‘वारि’ नपुंसकलिङ्ग है, और उसका द्विवचन रूप ‘वारिणी’ प्रथमा तथा द्वितीया—दोनों विभक्तियों में एक-सा रहता है, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 147
पाणिनीयमाहेश्वरसूत्रेषु स्वरबोधकानां सूत्राणां संख्या का अस्ति?
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सही उत्तर: (B) चत्वारः
माहेश्वर सूत्रों में स्वरबोधक चार सूत्र हैं—अइउण्, ऋऌक्, एओङ् और ऐऔच्।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 148
‘ते’ अस्ति
उत्तर देखें

सही उत्तर: (D) उपर्युक्तेषु एकस्माद् अधिकम्
‘ते’ रूप ‘तत्’ शब्द के नपुंसकलिङ्ग प्रथमा द्विवचन में भी आता है और स्त्रीलिङ्ग प्रथमा द्विवचन में भी, इसलिए उत्तर ‘एक से अधिक’ है। पुल्लिङ्ग प्रथमा द्विवचन का रूप ‘तौ’ होता है।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 149
‘साधवे’ शब्दरूपे साधुशब्दस्य के विभक्तिवचने प्रयुक्ते स्तः?
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सही उत्तर: (C) चतुर्थी एकवचनम्
‘साधवे’ में ‘साधु’ शब्द की चतुर्थी विभक्ति, एकवचन है—साधु के लिए।

1 अंक · 2024 · सेट E
प्रश्न 150
‘गवां गोषु वा कृष्णा बहुक्षीरा’ इति वाक्यं कस्य सूत्रस्य उदाहरणमस्ति?
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सही उत्तर: (C) यतश्च निर्धारणम्
‘गवां गोषु वा कृष्णा बहुक्षीरा’ में अनेक गायों में से एक को छाँटा जा रहा है, यानी निर्धारण हो रहा है—इसलिए यह ‘यतश्च निर्धारणम्’ का उदाहरण है, जिससे षष्ठी या सप्तमी आती है।

1 अंक · 2024 · सेट E
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