📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)सभी जीव अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। जंतु और कवक दूसरों के बनाए भोजन पर निर्भर रहते हैं।
पर निर्भर रहने के तरीके भी अलग-अलग हैं—कोई निगल लेता है, कोई चूस लेता है और कोई बाहर ही पचा लेता है।
🧠 समझिए (Understand)विषमपोषी पोषण (Heterotrophic nutrition) में जीव दूसरे जीवों द्वारा तैयार किए गए जटिल पदार्थों का अंतर्ग्रहण करते हैं।
इन जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में खंडित करना अनिवार्य है; इसके लिए जीव जैव-उत्प्रेरक का उपयोग करते हैं, जिन्हें एंजाइम (Enzymes) कहते हैं।
प्राणीसमभोजी पोषण में जीव भोजन के टुकड़े निगल लेता है और शरीर के भीतर पचाता है, जैसे मनुष्य और अमीबा।
मृतजीवी पोषण में जीव मृत और सड़े हुए पदार्थों पर एंजाइम छोड़कर उन्हें बाहर ही पचा लेता है और फिर अवशोषित कर लेता है, जैसे कवक और ब्रेड पर लगने वाली फफूँद।
परजीवी पोषण में जीव दूसरे जीव के शरीर से पोषण लेता है और उसे हानि पहुँचाता है, जैसे अमरबेल, जूँ और मलेरिया परजीवी।
अमीबा अपनी सतह से कूटपाद निकालकर भोजन कण को घेर लेता है और खाद्य रिक्तिका बना लेता है। पैरामीशियम में कोशिका का आकार निश्चित होता है और भोजन एक निश्चित स्थान से ही भीतर लिया जाता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — अमीबा का पोषणअमीबा भोजन कैसे लेता है?
अमीबा अपनी कोशिका की सतह से अँगुली जैसे कूटपाद निकालकर भोजन कण को चारों ओर से घेर लेता है।
इससे एक खाद्य रिक्तिका बन जाती है, जिसके भीतर जटिल पदार्थ एंजाइम से सरल पदार्थों में टूटते हैं।
बचा हुआ अपचित भोजन कोशिका की सतह की ओर आकर बाहर निकाल दिया जाता है।
यह प्राणीसमभोजी पोषण का एक सरल उदाहरण है।
उदाहरण 2 (Example 2) — स्वपोषी और विषमपोषी में अंतरदोनों में बुनियादी फर्क क्या है?
स्वपोषी सरल अकार्बनिक पदार्थों—कार्बन डाइऑक्साइड और जल—से स्वयं अपना भोजन बना लेते हैं और इसके लिए उन्हें सूर्य के प्रकाश तथा पर्णहरित की आवश्यकता होती है।
विषमपोषी स्वयं भोजन नहीं बना सकते; वे दूसरे जीवों के बनाए जटिल पदार्थों पर निर्भर रहते हैं और उन्हें एंजाइम से तोड़ते हैं।
स्वपोषी भोजन बनाते हैं, विषमपोषी भोजन लेते हैं—यही मुख्य अंतर है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)सभी कवक परजीवी होते हैं। ❌
अधिकांश कवक मृतजीवी हैं—वे मृत और सड़े पदार्थों पर जीते हैं, जीवित शरीर पर नहीं।
कवक प्रायः मृतजीवी होते हैं; कुछ ही परजीवी हैं।