प्रतिवर्ती क्रिया एक अनैच्छिक और तत्काल अनुक्रिया है, जिसका निर्णय मेरुरज्जु में होता है और हमें सोचने का मौका नहीं मिलता।
टहलना एक ऐच्छिक क्रिया है, जिसका निर्णय अग्रमस्तिष्क के प्रेरक क्षेत्र द्वारा होता है और हम चाहें तो रुक सकते हैं।
उत्तर: अंतर निर्णय के स्थान और नियंत्रण का है—प्रतिवर्ती क्रिया मेरुरज्जु से और अनैच्छिक है, जबकि टहलना मस्तिष्क से और ऐच्छिक है।
पहली कोशिका के एक्सॉन के सिरे तक संदेश विद्युत आवेग के रूप में आता है।
वहाँ यह आवेग कुछ रसायनों का स्रावण करता है, जो सिनेप्स के खाली स्थान को पार कर जाते हैं।
अगली कोशिका की द्रुमिका पर पहुँचकर ये रसायन फिर से वैसा ही विद्युत आवेग शुरू कर देते हैं।
उत्तर: सिनेप्स पर संदेश विद्युत रूप से रासायनिक रूप में और फिर रासायनिक से विद्युत रूप में बदलता है।
मस्तिष्क के तीन भाग हैं—अग्रमस्तिष्क, मध्यमस्तिष्क और पश्चमस्तिष्क।
पश्चमस्तिष्क का एक भाग अनुमस्तिष्क कहलाता है।
उत्तर: अनुमस्तिष्क (Cerebellum) शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है। इसी के कारण हम सीधी रेखा में चल पाते हैं और साइकिल चला पाते हैं।
नाक में घ्राण ग्राही होते हैं, जो गंध के अणुओं को पहचानते हैं।
वहाँ से सूचना विद्युत आवेग के रूप में संवेदी तंत्रिका द्वारा अग्रमस्तिष्क तक जाती है।
उत्तर: अग्रमस्तिष्क में गंध के लिए अलग केंद्र होता है, जो इस सूचना की व्याख्या करता है और हमें गंध का अनुभव होता है।
प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में ही पूरा हो जाता है, इसलिए अनुक्रिया करने में मस्तिष्क की कोई भूमिका नहीं होती।
मेरुरज्जु से होकर संवेदी संकेत मस्तिष्क तक पहुँचते जरूर हैं, पर अनुक्रिया उससे पहले ही हो चुकी होती है।
उत्तर: मस्तिष्क को घटना की सूचना मिलती है और वह उसका अनुभव तथा विश्लेषण करता है, पर अनुक्रिया का निर्णय मेरुरज्जु करता है। इसीलिए हमें दर्द हाथ हटने के बाद महसूस होता है।