📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)छुई-मुई की पत्तियाँ छूते ही मुड़ जाती हैं। पर पौधे में न तंत्रिका तंत्र है, न पेशी।
फिर इतनी तेज़ अनुक्रिया कैसे हो जाती है?
🧠 समझिए (Understand)पादपों में न तंत्रिका तंत्र होता है और न ही पेशियाँ, फिर भी वे उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करते हैं।
छुई-मुई की पत्तियाँ स्पर्श की अनुक्रिया से बहुत तेज़ी से गति करती हैं। इस गति का वृद्धि से कोई संबंध नहीं है।
पादप स्पर्श की सूचना एक कोशिका से दूसरी तक विद्युत-रासायनिक संकेत के रूप में भेजते हैं, क्योंकि उनके पास संवहन के लिए विशेष तंत्रिका ऊतक नहीं है।
गति दिखाने के लिए कोशिकाएँ अपनी आकृति बदलती हैं, और यह जल की मात्रा बदलने से होता है। जल बाहर जाने पर कोशिका सिकुड़ जाती है और पत्ती झुक जाती है।
इसके विपरीत, नवोद्भिद की दिशिक गति वृद्धि के कारण होती है। यदि उसकी वृद्धि रोक दी जाए तो वह कोई गति नहीं दिखाएगा।
इस प्रकार पादप दो भिन्न प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं—एक वृद्धि पर आश्रित और दूसरी वृद्धि से मुक्त।
उदाहरण 1 (Example 1) — छुई-मुई में गति का कारणपत्ती छूते ही क्यों मुड़ जाती है?
स्पर्श की सूचना एक कोशिका से दूसरी तक विद्युत-रासायनिक संकेत के रूप में पहुँचती है।
संकेत मिलते ही पत्ती के आधार की कोशिकाएँ अपना जल बाहर निकाल देती हैं।
जल कम होने से कोशिकाएँ सिकुड़ जाती हैं और पत्ती झुक जाती है।
यह गति जल की मात्रा बदलने से होती है और वृद्धि से इसका कोई संबंध नहीं।
उदाहरण 2 (Example 2) — छुई-मुई और टाँग की गति में अंतरदोनों तेज़ गतियाँ हैं, पर तरीका अलग है।
हमारी टाँग की गति पेशी ऊतक से होती है और उसे तंत्रिका तंत्र नियंत्रित करता है; इसमें विशेष प्रोटीन काम करती है।
छुई-मुई में न तंत्रिका तंत्र है, न पेशी—वहाँ कोशिकाएँ जल की मात्रा बदलकर आकृति बदलती हैं।
एक में तंत्रिका और पेशी, दूसरी में जल का आवागमन—यही अंतर है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)छुई-मुई की गति वृद्धि के कारण होती है। ❌
वृद्धि वाली गति धीमी और स्थायी होती है; छुई-मुई की गति तेज़ है और कुछ देर बाद पत्ती फिर खुल जाती है।
छुई-मुई की गति जल की मात्रा बदलने से होती है, वृद्धि से नहीं।