पादपों में न तंत्रिका तंत्र होता है, न पेशियाँ, फिर भी उन्हें अपनी वृद्धि और अनुक्रियाओं में तालमेल बिठाना होता है।
यह काम कुछ रसायन करते हैं, जो पादप के एक भाग में बनकर दूसरे भाग तक पहुँचते हैं।
उत्तर: पादपों की वृद्धि, विकास तथा उद्दीपन के प्रति अनुक्रियाओं का नियंत्रण करने वाले इन रसायनों को पादप हॉर्मोन कहते हैं। ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन तथा ऐब्सिसिक अम्ल इसके उदाहरण हैं।
छुई-मुई की पत्तियों की गति स्पर्श की अनुक्रिया है, बहुत तेज़ होती है और उसका वृद्धि से कोई संबंध नहीं—वह कोशिकाओं में जल की मात्रा बदलने से होती है।
प्रकाश की ओर प्ररोह की गति वृद्धि के कारण होती है, बहुत धीमी होती है और स्थायी रहती है।
उत्तर: पहली गति वृद्धि से मुक्त और उलटने योग्य है, जबकि दूसरी वृद्धि पर आश्रित और दिशिक है।
ऑक्सिन प्ररोह के अग्र भाग में संश्लेषित होता है।
उत्तर: ऑक्सिन (Auxin)। यह कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाकर वृद्धि कराता है। जिबरेलिन भी तने की वृद्धि में सहायक है।
प्रतान जिस ओर सहारे को छूता है, उस ओर स्पर्श का उद्दीपन मिलता है।
ऑक्सिन सहारे से दूर वाली ओर अधिक इकट्ठा हो जाता है और वहाँ की कोशिकाओं की लंबाई अधिक बढ़ा देता है।
उत्तर: दोनों ओर असमान वृद्धि होने के कारण प्रतान मुड़ता जाता है और सहारे के चारों ओर लिपट जाता है।
एक चौड़ी ट्रे में नम चूरा या मिट्टी भरकर उसमें कुछ बीज बो दीजिए।
ट्रे के एक सिरे पर एक छिद्रयुक्त बर्तन रखकर केवल उसी ओर जल दीजिए, ताकि नमी एक ही दिशा में अधिक रहे।
कुछ दिनों बाद मिट्टी हटाकर जड़ों की दिशा ध्यान से देखिए।
उत्तर: जड़ें सीधी नीचे जाने के बजाय जल वाली दिशा की ओर मुड़ी हुई मिलेंगी। यही दिखाता है कि जड़ें जल की ओर वृद्धि करती हैं, जिसे धनात्मक जलानुवर्तन कहते हैं।