जीवाणु और कवक पदार्थों को अपने एंजाइमों की सहायता से तोड़ते हैं। हर एंजाइम कुछ विशेष रासायनिक संरचनाओं पर ही काम कर सकता है।
भोजन, पत्तियाँ और कागज जैसे प्राकृतिक पदार्थों को ये एंजाइम सरल पदार्थों में बदल देते हैं, इसलिए वे जैव निम्नीकरणीय हैं।
प्लास्टिक और अनेक मानव निर्मित रसायनों को तोड़ने वाले उपयुक्त एंजाइम प्रकृति में नहीं होते या उनका अपघटन बहुत धीमा होता है। इसलिए वे अजैव निम्नीकरणीय हैं।
उत्तर: पदार्थ की रासायनिक संरचना और अपघटकों के एंजाइमों की उस पर क्रिया करने की क्षमता यह अंतर तय करती है।
लाभकारी प्रभाव—अपघटन के बाद पोषक तत्त्व मिट्टी में लौटते हैं और कम्पोस्ट बन सकती है।
हानिकारक प्रभाव—बहुत अधिक गीला कचरा जमा होने पर दुर्गंध, मक्खियाँ, रोगाणु और मीथेन पैदा हो सकती है।
उत्तर: ये पदार्थ सही प्रबंधन पर पोषक पुनर्चक्रण करते हैं, पर खुले ढेर में जमा होने पर प्रदूषण और स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकते हैं।
वे लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं, इसलिए भूमि और जल में जमा होकर प्रदूषण पैदा करते हैं।
प्लास्टिक नालियाँ रोक सकता है और पशु उसे भोजन समझकर खा सकते हैं।
DDT जैसे स्थायी रसायन आहार शृंखला में प्रवेश करके जैव आवर्धन करते हैं।
उत्तर: इनका संचय और आहार शृंखला में बढ़ती सांद्रता दो प्रमुख हानिकारक प्रभाव हैं।
किसी क्षेत्र के जीव, उसके अजैव घटक और उनके बीच की पारस्परिक क्रियाएँ मिलकर एक कार्यशील इकाई बनाती हैं। इसे पारितंत्र कहते हैं।
वन या तालाब प्राकृतिक पारितंत्र है, क्योंकि उसकी मूल व्यवस्था प्रकृति में विकसित होती है।
फसल का खेत या जलजीवशाला कृत्रिम पारितंत्र है, क्योंकि मनुष्य उसकी रचना और देखभाल करता है।
जीवित घटक जैव घटक कहलाते हैं—जैसे पौधे, जंतु, जीवाणु और कवक।
निर्जीव भौतिक तथा रासायनिक घटक अजैव घटक कहलाते हैं—जैसे सूर्यप्रकाश, जल, वायु, मिट्टी, तापमान और खनिज।
दोनों एक-दूसरे से जुड़े हैं; उदाहरण के लिए पौधे प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं।
जीवाणु और कवक मृत पौधों, मृत जंतुओं और अपशिष्ट के जटिल कार्बनिक पदार्थों को तोड़ते हैं।
इससे सरल अकार्बनिक पदार्थ और खनिज लवण बनते हैं, जो मिट्टी और जल में लौटते हैं।
पौधे इन्हीं पोषक तत्त्वों को फिर ग्रहण करते हैं।
उत्तर: अपघटक पर्यावरण की सफाई और पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं; उनके बिना मृत पदार्थ जमा होता जाता।