📖 उदाहरण से समझें (Learn with an Example)घास को टिड्डा, टिड्डे को मेंढक और मेंढक को साँप खाता है। भोजन के साथ ऊर्जा भी इसी क्रम में एक जीव से दूसरे जीव तक पहुँचती है।
🧠 समझिए (Understand)जीवों की वह क्रमिक शृंखला जिसमें एक जीव दूसरे जीव का भोजन बनता है, आहार शृंखला (Food chain) कहलाती है।
आहार शृंखला के हर चरण को पोषी स्तर (Trophic level) कहते हैं। उत्पादक पहला, शाकाहारी दूसरा, छोटे मांसाहारी तीसरा और बड़े मांसाहारी चौथा पोषी स्तर बनाते हैं।
हरे पौधे उन पर पड़ने वाली सौर ऊर्जा का लगभग 1% भोजन की रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं।
किसी पोषी स्तर की उपलब्ध ऊर्जा का लगभग 10% ही अगले स्तर तक पहुँचता है। बाकी ऊर्जा जीवन क्रियाओं और ऊष्मा के रूप में खर्च हो जाती है। इसे 10 प्रतिशत नियम (Ten per cent law) कहते हैं।
ऊर्जा बहुत तेजी से घटती है, इसलिए आहार शृंखलाएँ सामान्यतः तीन या चार पोषी स्तरों तक सीमित रहती हैं। ऊर्जा का प्रवाह सूर्य से उत्पादक और फिर उपभोक्ताओं की ओर एकदिशीय होता है।
उदाहरण 1 (Example 1) — घास → हिरण → बाघघास में 10,000 J ऊर्जा उपलब्ध है।
घास उत्पादक और पहला पोषी स्तर है।
हिरण तक लगभग 10,000 × 10/100 = 1,000 J पहुँचेगी।
बाघ तक लगभग 1,000 × 10/100 = 100 J पहुँचेगी।
ऊपर के पोषी स्तर पर ऊर्जा कम मिलती है।
⚠️ आम ग़लती (Common mistake)तीर उस जीव की ओर बनता है जिसे खाया जाता है। ❌
तीर भोजन और ऊर्जा के प्रवाह की दिशा दिखाता है।
घास → हिरण का अर्थ है ऊर्जा घास से हिरण तक गई।