E, PQ पर और F, PR पर हैं। पहले PE/EQ और PF/FR मिलाएँ; समांतर होना पहले से नहीं माना है।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): यदि DE ∥ BC हो, तो AD/DB = AE/EC। अनुपात में संगत भाग सही क्रम में रखें।
PQ पर PE/EQ=3.9/3=1.3। PR पर PF/FR=3.6/2.4=1.5। ये अनुपात बराबर नहीं हैं।
यदि EF, QR के समांतर होता, तो आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT) के अनुसार PE/EQ=PF/FR होता। यहाँ 1.3≠1.5, इसलिए EF, QR के समांतर नहीं है।
नहीं, EF समांतर नहीं है
E, PQ पर और F, PR पर हैं। पहले PE/EQ और PF/FR मिलाएँ; समांतर होना पहले से नहीं माना है।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): यदि DE ∥ BC हो, तो AD/DB = AE/EC। अनुपात में संगत भाग सही क्रम में रखें।
PE/EQ=4/4.5=8/9 और PF/FR=8/9। दोनों भुजाएँ समान अनुपात में बँटी हैं।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय के विलोम (Converse of BPT) के अनुसार दो भुजाओं को समान अनुपात में बाँटने वाली रेखा तीसरी भुजा के समांतर होती है। इसलिए EF || QR।
हाँ, EF || QR है
E, PQ पर और F, PR पर हैं। पहले PE/EQ और PF/FR मिलाएँ; समांतर होना पहले से नहीं माना है।
यदि ΔABC ~ ΔDEF, तो संगत भुजाएँ समान अनुपात में होती हैं: AB/DE = BC/EF = CA/FD। पहले संगत शीर्ष पहचानें।
EQ = 1.28−0.18 = 1.1, FR = 2.56−0.36 = 2.2।
PE/EQ = 0.18/1.1 = 9/55, PF/FR = 0.36/2.2 = 9/55 — बराबर। EF || QR है।
हाँ, EF || QR है
आकृति में, DE || BC है। AD = 1.5 cm, AE = 1 cm, DB = 3 cm है।
EC ज्ञात कीजिए।
D, AB पर और E, AC पर हैं। DE ∥ BC हो तो AD/DB = AE/EC; ऊपर के हिस्से ऊपर और नीचे के हिस्से नीचे रखें।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): यदि DE ∥ BC हो, तो AD/DB = AE/EC। अनुपात में संगत भाग सही क्रम में रखें।
AD/DB = AE/EC से 1.5/3 = 1/EC।
EC = 1×3/1.5 = 2 cm।
2 cm
आकृति में, DE || BC है। BD = 7.2 cm, AE = 1.8 cm, EC = 5.4 cm है।
AD ज्ञात कीजिए।
D, AB पर और E, AC पर हैं। DE ∥ BC हो तो AD/DB = AE/EC; ऊपर के हिस्से ऊपर और नीचे के हिस्से नीचे रखें।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): यदि DE ∥ BC हो, तो AD/DB = AE/EC। अनुपात में संगत भाग सही क्रम में रखें।
AD/DB = AE/EC से AD/7.2 = 1.8/5.4।
AD = 7.2×1.8/5.4 = 2.4 cm।
2.4 cm
ΔABC में D, AB का मध्यबिंदु है। D से BC के समांतर रेखा AC को E पर काटती है।
AE = EC, अर्थात E भी मध्यबिंदु है।
आधारभूत समानुपातिकता प्रमेय (BPT): यदि DE ∥ BC हो, तो AD/DB = AE/EC। अनुपात में संगत भाग सही क्रम में रखें।
AD = DB, इसलिए AD/DB = 1।
DE ∥ BC से AD/DB = AE/EC। बाईं ओर 1 रखने पर AE/EC = 1।
AE = EC। अतः समांतर रेखा तीसरी भुजा को भी दो बराबर भागों में बाँटती है।
समलंब ABCD में AB ∥ DC; AC और BD का मिलन O है।
AO/BO = CO/DO।
O पर दोनों विकर्ण मिलते हैं। A, O, C एक रेखा पर और B, O, D दूसरी रेखा पर हैं।
समरूप त्रिभुजों के संगत कोण बराबर होते हैं। त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
∠AOB = ∠COD (शीर्षाभिमुख कोण)। AB ∥ DC से ∠ABO = ∠CDO (एकांतर अंतः कोण)।
AA से ΔAOB ∼ ΔCOD। संगत क्रम A ↔ C, B ↔ D, O ↔ O है। इसलिए AO/CO = BO/DO।
क्रॉस गुणा करने पर AO × DO = BO × CO। BO × DO से भाग देने पर AO/BO = CO/DO।
अतः AO/BO = CO/DO सिद्ध हुआ।
चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC और BD, O पर मिलते हैं; AO/BO = CO/DO।
AB ∥ DC, अर्थात ABCD समलंब है।
O पर दोनों विकर्ण मिलते हैं। A, O, C एक रेखा पर और B, O, D दूसरी रेखा पर हैं।
संगत भुजाओं का अनुपात = √(क्षेत्रफलों का अनुपात)। वर्गमूल लेते समय लंबाई के लिए धनात्मक मान लें।
दिए अनुपात से AO × DO = BO × CO। CO × DO से भाग देने पर AO/CO = BO/DO।
∠AOB = ∠COD, क्योंकि ये शीर्षाभिमुख कोण हैं। इन कोणों से लगी दो-दो भुजाएँ समान अनुपात में हैं। इसलिए SAS से ΔAOB ∼ ΔCOD।
समरूपता से ∠ABO = ∠CDO। ये तिर्यक रेखा BD के एकांतर अंतः कोण हैं। इनके बराबर होने से AB ∥ DC।
ABCD में विपरीत भुजाओं का एक युग्म समांतर है; अतः ABCD समलंब है।