दो घनों, जिनमें से प्रत्येक का आयतन 64 cm³ है, के संलग्न फलकों को मिलाकर एक ठोस बनाया जाता है।
इससे प्राप्त घनाभ का पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
घन की भुजा a हो तो TSA=6a², आयतन=a³ और मुख्य विकर्ण=a√3।
आयतन=a³=64 से a=4 cm।
दो घन जोड़ने पर घनाभ 8×4×4 cm बनता है।
TSA = 2(lb+bh+hl) = 2(32+16+32) = 160 cm²।
160 cm²
एक खिलौना त्रिज्या 3.5 cm वाले एक शंकु के आकार का है, जो उसी त्रिज्या वाले एक अर्धगोले पर अध्यारोपित है। इस खिलौने की संपूर्ण ऊँचाई 15.5 cm है।
इस खिलौने का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
जुड़े ठोस में केवल दिखाई देने वाली बाहरी सतह जोड़ें। शंकु का CSA=πrl और अर्धगोले का CSA=2πr²; जुड़ा गोल आधार नहीं गिनते।
शंकु की ऊँचाई = 15.5−3.5 = 12 cm। तिर्यक ऊँचाई l = √(3.5²+12²) = 12.5 cm।
TSA = शंकु का CSA + अर्धगोले का CSA = πrl + 2πr² = (22/7)(3.5)(12.5) + 2(22/7)(3.5)² = 137.5+77 = 214.5 cm²।
214.5 cm²
बीच में बेलन और दोनों सिरों पर अर्धगोले हैं। दोनों अर्धगोले मिलकर एक गोला बनाते हैं। कुल लंबाई में से 2r घटाने पर बेलन की लंबाई मिलती है।
गोला: V=(4/3)πr³, क्षेत्रफल=4πr²। अर्धगोला: V=(2/3)πr³, CSA=2πr² और TSA=3πr²।
कैप्सूल की त्रिज्या r=5/2=2.5 mm है। दोनों अर्धगोलों की कुल लंबाई 2r=5 mm है। इसलिए बीच के बेलन की ऊँचाई h=14−5=9 mm।
बेलन का वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल (Curved surface area)=2πrh=2π×2.5×9=45π। दोनों अर्धगोले मिलकर एक गोले जितना पृष्ठ देते हैं: 4πr²=4π×2.5²=25π। जुड़ी हुई गोल सतहें बाहर नहीं दिखतीं, इसलिए उन्हें नहीं जोड़ते।
कुल = 45π+25π=70π। π=22/7 लेने पर क्षेत्रफल = 70×22/7=220 mm²।
220 mm²
लकड़ी के एक ठोस बेलन के प्रत्येक सिरे पर एक अर्धगोला खोदकर निकालते हुए, एक वस्तु बनाई गई है। बेलन की ऊँचाई 10 cm है और आधार की त्रिज्या 3.5 cm है।
इस वस्तु का संपूर्ण पृष्ठीय क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
गोला: V=(4/3)πr³, क्षेत्रफल=4πr²। अर्धगोला: V=(2/3)πr³, CSA=2πr² और TSA=3πr²।
CSA = 2π(3.5)(10) = 220 cm²।
खोदने से हर सिरे पर सपाट वृत्त की जगह अर्धगोले का वक्रपृष्ठ दिखता है: 2×2π(3.5)² = 154 cm²।
220+154 = 374 cm²।
374 cm²